खंड
– क
(अपठित गद्यांश)
प्रश्न
1. निम्नलिखित
गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इसके आधार पर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त
उत्तर लिखिए-
(7)
समय का सदुपयोग जीवन में सफलता प्राप्त करने की कुंजी माना जाता है।
जो व्यक्ति समय के महत्व को समझता है, वह अपने जीवन में अनुशासन और
प्रगति दोनों प्राप्त करता है। आज के युग में लोग प्रायः समय की कमी की शिकायत
करते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि वे अपने समय का उचित
प्रबंधन नहीं कर पाते। अनेक विद्यार्थी मनोरंजन और मोबाइल फ़ोन में इतना अधिक समय
व्यतीत कर देते हैं कि पढ़ाई और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए पर्याप्त समय नहीं
बचता।
समय एक ऐसी संपत्ति है जिसे एक बार खो देने पर वापस प्राप्त नहीं किया
जा सकता। इतिहास में अनेक महान व्यक्तियों ने समय का सही उपयोग करके ही सफलता
अर्जित की। यदि विद्यार्थी प्रारम्भ से ही समय का महत्व समझें और अपने कार्यों को योजनाबद्ध ढंग
से करें, तो वे न केवल शिक्षा में
उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं, बल्कि जीवन के प्रत्येक
क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को समय का सम्मान
करना चाहिए और उसका सदुपयोग करना चाहिए।
निम्नलिखित
प्रश्नों के सही विकल्प चुनिए-
(1)
जीवन में सफलता प्राप्त करने की कुंजी किसे माना गया है?
(क) धन को
(ख) समय
के सदुपयोग को
(ग) मित्रता
को
(घ) खेल
को
(2)
निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R)
को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए-
कथन
(A) : समय का सदुपयोग सफलता की कुंजी है।
कारण
(R) : समय का उचित प्रबंधन व्यक्ति को
अनुशासित और प्रगतिशील बनाता है।
(क) कथन(A) सही
है पर कारण(R) सही नहीं है।
(ख) कथन(A) और
कारण(R) दोनों सही हैं, पर कारण(R),
कथन(A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(ग) कथन(A) सही
नहीं है और कारण(R) सही हैं।
(घ) कथन(A) और
कारण(R) दोनों गलत हैं।
(3) विद्यार्थियों को अपने कार्य कैसे
करने चाहिए?
(क) जल्दबाजी में
(ख) योजनाबद्ध ढंग
से
(ग) बिना सोचे-समझे
(घ) दूसरों की
सहायता से
(4)
विद्यार्थी किस कारण पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते?
(2)
(5)
समय को कैसी संपत्ति कहा गया है और क्यों? (2)
प्रश्न
2. विज्ञान और तकनीक के इस आधुनिक युग में मनुष्य का
जीवन अत्यंत सुविधाजनक हो गया है, किंतु इसके साथ अनेक चुनौतियाँ
भी उत्पन्न हुई हैं। विशेष रूप से मोबाइल फ़ोन और इंटरनेट ने लोगों के जीवन को
गहराई से प्रभावित किया है। जहाँ एक ओर ये साधन ज्ञान, संचार
और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए हैं, वहीं
दूसरी ओर इनका अत्यधिक उपयोग लोगों को मानसिक तनाव, समय की
बर्बादी और सामाजिक दूरी की ओर भी ले जा रहा है।
आज अनेक विद्यार्थी पढ़ाई की अपेक्षा सोशल मीडिया और ऑनलाइन मनोरंजन
में अधिक रुचि लेने लगे हैं, जिसके कारण उनकी एकाग्रता और
अध्ययन क्षमता प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक का उपयोग आवश्यकता और संतुलन के साथ किया जाए, तभी इसके सकारात्मक परिणाम
प्राप्त किए जा सकते हैं। यदि मनुष्य तकनीकी साधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करे,
तो वह अपने जीवन को अधिक सफल, ज्ञानवर्धक और
व्यवस्थित बना सकता है। अतः आवश्यक है कि हम तकनीक को अपना सेवक बनाएँ, स्वामी नहीं।
(7)
1. तकनीक
के अत्यधिक उपयोग से क्या हानि हो सकती है?
(क) समय की बचत
(ख) मानसिक तनाव
(ग) अधिक एकाग्रता
(घ) पढ़ाई में रुचि
2. मोबाइल
फ़ोन और इंटरनेट से किस क्षेत्र में परिवर्तन आया है?
(क) केवल खेल के क्षेत्र में
(ख) ज्ञान, संचार और शिक्षा के
क्षेत्र में
(ग) केवल मनोरंजन के क्षेत्र में
(घ) केवल व्यापार के क्षेत्र में
3.
कथन (A): मोबाइल फ़ोन और
इंटरनेट केवल हानिकारक हैं।
कारण (R):
इनसे ज्ञान, शिक्षा और संचार में सहायता मिलती है।
(क) कथन(A) गलत है तथा कारण (R) सही है।
(ख) कथन(A) और कारण(R) दोनों सही हैं।
(ग) कथन (A) सही है, पर कारण (R) गलत है।
(घ) कथन (A) और कारण (R) दोनों गलत हैं।
4. आधुनिक
युग में मनुष्य के जीवन में क्या परिवर्तन आया है? (2)
5. मोबाइल
फ़ोन और इंटरनेट के दो लाभ लिखिए।
(2)
खंड – ख
(व्यावहारिक
व्याकरण)
प्रश्न3) i)ननिम्नलिखित शब्दों मे उपसर्ग और मूल
शब्द अलग कीजिए: (3)
क)
दुर्बल
ख) परलोक
ग) अनमोल
ii) उचित उपसर्ग लगाकर नए शब्द बनाइए: (2)
क) पुत्र → _______
ख) जय→ _______निम्नलिखित शब्दों में
मूलशब्द व उपसर्ग अलग करके लिखिए –म्नलिखित शब्दों
प्रश्न4) i)मूनिम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम चिह्न लगाकर पुनः लिखिए:ल (3)शब्द
क) हाँ मैं यह चित्र बना लूँगा
ख) कामायनी कवि जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध कृति है
ग) शिक्षक ने कहा सभी बच्चे शांत रहें और ध्यान से सुनें
ii) निम्नलिखित विराम चिह्नों का प्रयोग कब किया जाता
है? (2)
(क) हंसपद
(ख) लाघव
खंड
– ग
(पाठ्यपुस्तक)
प्रश्न
5) निम्नलिखित
गद्यांश पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए- (5)
संयोग की बात, झूरी ने एक बार गोईं को ससुराल भेज दिया। बैलों को क्या मालूम, वे क्यों भेजे जा रहे हैं। समझे, मालिक ने हमें बेच
दिया। अपना यों बेचा जाना उन्हें अच्छा लगा या बुरा, कौन
जाने, पर झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों
पसीना आ गया। पीछे से हाँकता तो दोनों दाएँ-बाएँ भागते; पगहिया
पकड़कर आगे से खींचता, तो दोनों पीछे को जोर लगाते। मारता तो
दोनों सींग नीचे करके हुँकारते। अगर ईश्वर ने उन्हें वाणी दी होती, तो झूरी से पूछते - तुम हम गरीबों को क्यों निकाल रहे हो? हमने तो तुम्हारी सेवा करने में कोई कसर नहीं उठा रखी। अगर इतनी मेहनत से
काम न चलता था तो और काम ले लेते। हमें तो तुम्हारी चाकरी में मर जाना कबूल था।
हमने कभी दाने-चारे की शिकायत नहीं की। तुमने जो कुछ खिलाया, वह सिर झुकाकर खा लिया, फिर तुमने हमें इस जालिम के
हाथ क्यों बेच दिया?
1.
झूरी ने बैलों
को कहाँ भेज दिया?
क) बाजार
ख) खेत
ग) ससुराल
घ) जंगल
2. यदि बैलों को वाणी होती, तो वे झूरी से क्या पूछते?
क) हमें कम चारा क्यों दिया?
ख) हमें क्यों निकाल रहे हो?
ग) हमें क्यों मारा?
घ) हमें कहाँ ले जा रहे हो?
3.
बैलों को घर तक
ले जाने में किसे परेशानी हुई?
क) झूरी
ख) गया
ग) किसान
घ) नौकर
4.
जब गया पीछे से
हाँकता था, तब बैल क्या करते थे?
क) तेज भागते थे
ख) दाएँ-बाएँ भागते थे
ग) बैठ जाते थे
घ) सो जाते थे
5.
इस गद्यांश का
मुख्य भाव क्या है?
क) बैलों की चतुराई
ख) पशुओं और मालिक के बीच भावनात्मक संबंध
ग) गाँव का जीवन
घ) बाजार का वर्णन
प्रश्न 6) निम्नलिखित पद्यांश
पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए- (5)
प्रभु जी तुम चंदन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी।
प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।
प्रभु जी तुम दीपक, हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती।
प्रभु जी तुम मोती, हम धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा।
प्रभु जी तुम स्वामी, हम दासा, ऐसी भगति करै रैदासा।
1. कवि ने अपने और प्रभु के संबंध को स्पष्ट करने के लिए किसका सहारा
लिया है?
क) सामाजिक समस्याओं का
ख) युद्ध प्रसंगों का
ग) प्राकृतिक और दैनिक जीवन की वस्तुओं का
घ) ऐतिहासिक घटनाओं का
2. प्रभु जी तुम मोती, हम धागा” में ‘धागा’ किसका प्रतीक है?
क) संसार का
ख) भक्त का
ग) ज्ञान का
घ) धन का
3. कवि के अनुसार भगवान और भक्त का संबंध कैसा होना चाहिए?
क) केवल औपचारिक
ख) स्वार्थ पर आधारित
ग) अटूट, प्रेमपूर्ण और समर्पण से
भरा
घ) भय पर आधारित
4. रैदास के अनुसार ईश्वर की प्राप्ति का मुख्य साधन क्या है?
क) धन
ख) बाहरी आडंबर
ग) तीर्थ यात्रा
घ) मन की शुद्धता
5. प्रभु जी तुम स्वामी, हम दासा” पंक्ति से कौन-सा भाव व्यक्त होता है?
क) सख्य भाव
ख) वात्सल्य भाव
ग) दास्य भाव
घ) वीर भाव
प्रश्न 7) निम्नलिखित प्रश्नो में
से किन्ही तीन के उत्तर लिखिए- (लगभग 25-30 शब्दो में) (3x2=6) क) नए मालिक के यहाँ पहुँचने पर बैलों ने काम करने से इंकार क्यों कर
दिया? यह
उनके किस स्वभाव या मनोवृत्ति को प्रकट करता है?
ख) ‘दो बैलों की कथा’ पाठ के आधार पर
स्पष्ट कीजिए कि हीरा और मोती ने अत्याचार का सामना किस प्रकार किया और इससे हमें
क्या सीख मिलती है?"
ग) रैदास ने भक्ति के लिए तीर्थ और व्रत की अपेक्षा
किस साधन को आवश्यक माना है? आपके अनुसार सच्ची भक्ति का आधार क्या होना चाहिए?
घ) “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसा” पंक्ति का क्या आशय है?
खंड
– घ
(रचनात्मक-लेखन)
प्रश्न8) निम्नलिखित में से किसी एक विषय
पर अनुच्छेद लिखिए (100-120 शब्दो में)-
(5)
सोशल
मीडिया : लाभ और हानि
संकेत बिंदु-
· अर्थ
· संचार का आसान
माध्यम
· शिक्षा और जानकारी
में सहायता
· समय की बर्बादी और लत
· संतुलित उपयोग की आवश्यकता
अथवा
जीवन में नैतिक मूल्यों का महत्व
संकेत बिंदु-
·
नैतिक
मूल्य का अर्थ
·
जीवन
में इसकी आवश्यकता और महत्व
·
नैतिक
मूल्यों का ह्रास (गिरावट)
·
सुधार
के उपाय और उपसंहार
प्रश्न9) अपने छोटे भाई/बहन को परीक्षा में अच्छे
अंक लाने के लिए प्रेरित करते हुए पत्र लिखिए। (5)
अथवा
अपने मित्र को अपनी पढ़ाई और विद्यालय की
गतिविधियों के बारे में बताते हुए पत्र लिखिए।
ANSWER KEY
उत्तर1. (1) (ख) समय के सदुपयोग
को
(2) (ख) कथन(A) और कारण(R) दोनों सही हैं
(3) (ख) योजनाबद्ध ढंग से
(4) अनेक
विद्यार्थी मनोरंजन, मोबाइल
फ़ोन और अन्य गैर-ज़रूरी गतिविधियों में अधिक समय व्यतीत कर देते हैं। इसके कारण
वे अपने समय का सही प्रबंधन नहीं कर पाते, जिससे पढ़ाई और आवश्यक कार्यों के लिए पर्याप्त समय नहीं बचता।
(5) समय
को एक अमूल्य संपत्ति कहा गया है, क्योंकि
इसे एक बार खो देने पर वापस प्राप्त नहीं किया जा सकता। जो व्यक्ति समय का सही
उपयोग करता है, वही
जीवन में सफलता, अनुशासन
और प्रगति प्राप्त करता है।
उत्तर2. 1. (ख) मानसिक तनाव
2. (ख) ज्ञान, संचार और शिक्षा के
क्षेत्र में
3. (क) कथन(A) गलत है तथा कारण(R) सही है।
4. आधुनिक
युग में विज्ञान और तकनीक के कारण मनुष्य का जीवन अधिक सुविधाजनक, तेज़ और व्यवस्थित हो गया है। मोबाइल
फ़ोन और इंटरनेट ने संचार, शिक्षा
तथा ज्ञान प्राप्त करने के तरीकों में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया है।
5. मोबाइल
फ़ोन और इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करना आसान हो गया है तथा लोग एक-दूसरे
से तुरंत संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, शिक्षा, जानकारी
और संचार के क्षेत्र में भी इनसे बहुत सुविधा मिली है।
उत्तर3. I)
उपसर्ग मूल शब्द
(क) दुर्बल
→ दुर् बल
(ख) परलोक
→ पर लोक
(ग) अनमोल
→ अन मोल
ii) (क) पुत्र → सुपुत्र
(ख) जय → विजय
उत्तर4. i) (क) हाँ, मैं यह चित्र बना लूँगा।
(ख) ‘कामायनी’, कवि जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध कृति है।
(ग) शिक्षक ने कहा,
“सभी
बच्चे शांत रहें और ध्यान से सुनें।”
ii) (क)
हंसपद (^) :
हंसपद का प्रयोग तब किया जाता है,
जब लिखते समय कोई शब्द छूट जाए और उसे
बाद में जोड़ना हो।
(ख)
लाघव (॰) :
लाघव चिह्न का प्रयोग किसी शब्द के
संक्षिप्त रूप को लिखने के लिए किया जाता है। जैसे – डा॰ (डॉक्टर), श्री॰
उत्तर5. 1. (ग) ससुराल
2. (ख) हमें क्यों निकाल
रहे हो?
3. (ख) गया
4. (ख) दाएँ-बाएँ भागते
थे
5. (ख) पशुओं और मालिक
के बीच भावनात्मक संबंध
उत्तर6. 1.
(ग) प्राकृतिक और
दैनिक जीवन की वस्तुओं का
2. (ख) भक्त का
3.(ग) अटूट, प्रेमपूर्ण और
समर्पण से भरा
4. (घ) मन की शुद्धता
5. (ग) दास्य भाव
उत्तर7. (क) नए मालिक के यहाँ पहुँचने पर हीरा और
मोती ने काम करने से इसलिए इंकार कर दिया क्योंकि वहाँ उनके साथ कठोर और अमानवीय
व्यवहार किया जा रहा था। उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं दिया जाता था और मार-पीट भी की
जाती थी। वे अपने पुराने मालिक झूरी के प्रेम और स्नेह को नहीं भूल पाए थे।
उनका यह व्यवहार स्वाभिमान,
आत्मसम्मान, स्वतंत्रता-प्रिय तथा अपने मालिक के
प्रति निष्ठा को प्रकट करता है। वे ज़बरदस्ती के बजाय
केवल अपनत्व और सम्मान से ही काम कर सकते थे।
(ख) हीरा और मोती ने अत्याचार को चुपचाप सहन
नहीं किया। जब उन्हें भूखा रखा गया, मार-पीट की गई और अत्यधिक काम कराया गया, तब उन्होंने अन्याय का विरोध किया।
उन्होंने रस्सियाँ तोड़कर वहाँ से निकलने का प्रयास किया और अंततः अपने मालिक झूरी
के पास लौट आए।
इससे
हमें यह सीख मिलती है कि अन्याय
का साहसपूर्वक विरोध करना चाहिए, आत्मसम्मान की रक्षा करनी चाहिए और कठिन परिस्थितियों में भी
सत्य तथा साहस का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
(ग) रैदास ने भक्ति के लिए तीर्थ-यात्रा और
व्रत जैसे बाहरी आडंबरों की अपेक्षा भगवान के प्रति सच्चा प्रेम, विश्वास और पूर्ण समर्पण को अधिक आवश्यक माना है। उनके अनुसार सच्ची
भक्ति मन की पवित्रता और ईश्वर के चरणों में अटूट श्रद्धा से प्राप्त होती है।
मेरे अनुसार भी सच्ची भक्ति का
आधार कोई बाहरी दिखावा नहीं,
बल्कि अंतःकरण की शुद्धि, निश्छल
प्रेम और मानवता की निस्वार्थ सेवा होना चाहिए,
क्योंकि शुद्ध मन में ही ईश्वर वास करते हैं।
(घ)
इस पंक्ति का आशय यह है कि कवि रैदास को
ईश्वर प्राप्ति के लिए किसी तीर्थ यात्रा या व्रत-उपवास की कोई चिंता या आवश्यकता
महसूस नहीं होती। वे इन बाहरी आडंबरों को व्यर्थ मानते हैं। भगवान के चरण-कमल ही उनके
एकमात्र सहारा है जिनपर उन्हे अटूट विश्वास हैं।
कवि
के अनुसार ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा, प्रेम और समर्पण ही ईश्वर प्राप्ति का
वास्तविक मार्ग है।
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