Raidass Ke Padd ||
(1) अब कैसे छूटै राम रट लागी। प्रभु जी तुम चंदन हम पानी , जाकी अंग-अंग बास समानी। प्रभु जी तुम घन बन , हम मोरा , जैसे चितवत चंद चकोरा। प्रभु जी तुम दीपक , हम बाती , जाकी जोति बरै दिन राती। प्रभु जी तुम मोती , हम धागा , जैसे सोने मिलत सुहागा। प्रभु जी तुम स्वामी , हम दासा , ऐसी भगति करै रैदासा। ये पद संत रैदास (रविदास) द्वारा रचित अनन्य भक्ति और दास्य भाव के प्रसिद्ध पद हैं , जो प्रभु राम के प्रति अटूट प्रेम को दर्शाते हैं । इसमें रैदास जी खुद को तुच्छ (पानी , मोर , बाती , धागा) और प्रभु को महान (चंदन , बादल , दीपक , मोती) मानकर पूर्ण समर्पण करते हैं , और सांसारिक मोह त्यागकर एकमात्र ईश्वर की भक्ति में लीन हैं। इस प्रकार यह पद ' अद्वैत ' ( भक्त और भगवान का एक हो जाना) की सुंदर अभिव्यक्ति है। यहाँ हर उदाहरण का एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ है: 1. चंदन और पानी (समर्पण): चंदन कठोर होता है और पानी तरल। जब चंदन को पानी के साथ घिसा जाता है , तो चंदन अपना अस्तित्व खोकर पानी में मिल जाता है और पानी की साधारण गंध सुगंध में बदल जाती है। रै...