शुक्रतारे के समान || Class 9 ||

प्रश्न: रामन का पहला शोध-पत्र किस पत्रिका में प्रकाशित हुआ था?

उत्तर: उनका पहला शोध-पत्र 'फिलॉसॉफिकल मैगजीन' में प्रकाशित हुआ था।

प्रश्न: कलकत्ता की उस प्रयोगशाला का क्या नाम था जहाँ रामन शोध करते थे?

उत्तर: उस प्रयोगशाला का नाम 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस' था।

प्रश्न: आइंस्टाइन ने प्रकाश के बारे में क्या बताया था?

उत्तर: आइंस्टाइन ने बताया था कि प्रकाश अति सूक्ष्म कणों की तीव्र धारा के समान है, जिन्हें उन्होंने 'फोटॉन' नाम दिया।

प्रश्न: रामन प्रभाव की खोज ने किस क्षेत्र में क्रांति ला दी?

उत्तर: इस खोज ने भौतिकी और पदार्थों की आणविक व परमाणविक संरचना के अध्ययन के क्षेत्र में क्रांति ला दी।

प्रश्न: रामन के प्रारंभिक शोध कार्य को 'आधुनिक हठयोग' क्यों कहा गया है?

उत्तर: क्योंकि रामन ने सीमित साधनों और कामचलाऊ उपकरणों के होते हुए भी कठिन परिस्थितियों में अपना शोध कार्य जारी रखा।

प्रश्न: रामन ने किन वाद्य यंत्रों के वैज्ञानिक रहस्य को उजागर किया?

उत्तर: उन्होंने मृदंगम, तबला, वायलिन और पियानो जैसे देशी एवं विदेशी वाद्य यंत्रों पर शोध किया।

प्रश्न: रामन द्वारा स्थापित शोध संस्थान का क्या नाम है?

उत्तर: इस संस्थान का नाम 'रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट' (बंगलौर) है।

प्रश्न: रामन प्रभाव से पहले अणुओं की संरचना का अध्ययन किस तकनीक से किया जाता था?

उत्तर: इसके लिए 'इंफ्रा रेड स्पेक्ट्रोस्कोपी' का सहारा लिया जाता था।

प्रश्न: रामन का व्यक्तित्व कैसा था?

उत्तर: वे एक भावुक प्रकृति प्रेमी, जिज्ञासु वैज्ञानिक और प्रबल राष्ट्रीय चेतना वाले व्यक्ति थे।

प्रश्न: रामन को 'वैज्ञानिक चेतना का वाहक' क्यों कहा गया है?

उत्तर: क्योंकि उन्होंने न केवल स्वयं शोध किया, बल्कि देश के सैकड़ों छात्रों को प्रेरित किया और भारत में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में समर्पित रहे। 

प्रश्न: वेंकट रामन का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

उत्तर: चंद्रशेखर वेंकट रामन का जन्म 7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था।

प्रश्न: रामन के पिता किस विषय के शिक्षक थे?

उत्तर: उनके पिता भौतिकी और गणित के शिक्षक थे।

प्रश्न: रामन के मन में समुद्र के पानी को देखकर क्या जिज्ञासा जागी?

उत्तर: उनके मन में यह सवाल उठा कि "समुद्र के पानी का रंग नीला ही क्यों होता है?"

प्रश्न: 'रामन प्रभाव' की खोज कब हुई थी?

उत्तर: रामन प्रभाव की खोज आधिकारिक रूप से 28 फरवरी 1928 को हुई थी।

प्रश्न: भारत में 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस' कब मनाया जाता है?

उत्तर: रामन प्रभाव की खोज के उपलक्ष्य में हर वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है।

प्रश्न: चंद्रशेखर वेंकट रामन को नोबेल पुरस्कार से कब सम्मानित किया गया?

उत्तर: उन्हें वर्ष 1930 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

प्रश्न: रामन को भारत सरकार ने किस सर्वोच्च सम्मान से नवाजा?

उत्तर: उन्हें 1954 में देश के सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया।

प्रश्न: रामन ने अपनी सरकारी नौकरी (वित्त विभाग) क्यों छोड़ दी थी?

उत्तर: विज्ञान के प्रति अपने जुनून और अनुसंधान कार्य को पूरा समय देने के लिए उन्होंने अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी।

प्रश्न: रामन ने किन वाद्य यंत्रों पर अनुसंधान किया था?

उत्तर: उन्होंने भारतीय वाद्य यंत्रों (मृदंगम, तबला) और विदेशी वाद्य यंत्रों (वायलिन, पियानो) के ध्वनि विज्ञान पर शोध किया।

प्रश्न: रामन की खोज 'रामन प्रभाव' का मुख्य आधार क्या है?

उत्तर: प्रकाश का प्रकीर्णन अर्थात् जब प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम से गुजरता है तो उसके स्वभाव में परिवर्तन आता है।



 प्रश्न: महादेव भाई किस वर्ष गांधी जी के साथ जुड़े थे?

उत्तर: महादेव भाई 1917 में गांधी जी के साथ जुड़े थे।

महादेव भाई ने किस बंगाली लेखक की पुस्तकों का अनुवाद किया था?

उत्तर: उन्होंने प्रसिद्ध बंगाली लेखक शरद चंद्र की पुस्तकों का अनुवाद किया था।

प्रश्न: 'यंग इंडिया' और 'नवजीवन' पत्र कहाँ से प्रकाशित होते थे?

उत्तर: ये पत्र अहमदाबाद से प्रकाशित होते थे।

प्रश्न: महादेव भाई किसके 'शुक्रतारे' थे?

उत्तर: महादेव भाई गांधी जी के निजी जीवन और भारत के राष्ट्रीय आंदोलन के 'शुक्रतारे' थे।

प्रश्न: गांधी जी के पत्रों की नकल कौन करता था?

उत्तर: गांधी जी के पत्रों की नकल और उनका रिकॉर्ड महादेव भाई रखते थे।

लेखक ने महादेव भाई की प्रतिभा को 'बेजोड़' क्यों कहा है?

उत्तर: महादेव भाई की प्रतिभा इसलिए बेजोड़ थी क्योंकि उनमें अद्भुत कार्यक्षमता थी। वे दिन-रात गांधी जी की सेवा में व्यस्त रहने के बाद भी सुंदर हस्तलिपि में पत्र लिखना, अनुवाद करना और सभाओं का विवरण तैयार करना जैसे कठिन काम बड़ी कुशलता से करते थे।

महादेव भाई की मृत्यु के बाद गांधी जी पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: महादेव भाई की मृत्यु गांधी जी के लिए एक व्यक्तिगत क्षति थी। वे उन्हें अपने बेटे के समान मानते थे। उनकी कमी के कारण गांधी जी खुद को अधूरा महसूस करते थे और अक्सर उन्हें याद करके भावुक हो जाते थे। 

महादेव भाई गांधी जी की यात्राओं का विवरण कहाँ भेजते थे?

उत्तर: वे गांधी जी की यात्राओं और गतिविधियों का साप्ताहिक विवरण समाचार-पत्रों को भेजते थे। 

: महादेव भाई अपना परिचय किस रूप में देते थे?

उत्तर: महादेव भाई विनम्रतापूर्वक अपना परिचय गांधी जी के 'पीर बावर्ची भिश्ती खर' (अर्थात् उनके हर प्रकार के काम करने वाले सेवक) के रूप में देते थे।

प्रश्न 2: 'यंग इंडिया' साप्ताहिक पत्रिका में लेखों की कमी क्यों रहने लगी थी?

उत्तर: इसके अंग्रेजी संपादक हार्नीमैन को देश निकाला देकर इंग्लैंड भेज दिया गया था, जिसके कारण पत्रिका में लेखों की कमी हो गई थी।

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