Lesson Plan || Class 9 ||CBSE|| Hindi || Ganga book||Chapter -क्या लिखूँ? || Kya likhun || lesson plan for teachers ||
1. सामान्य सूचना (General Information)
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दिनांक:
________
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कक्षा: 9वीं
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विषय:
हिंदी
(गंगा -गद्य खंड)
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पाठ का नाम: क्या
लिखूँ?
लेखक: पदुमलाल
पुन्नालाल बख्शी
2. शिक्षण
उद्देश्य (Teaching Objectives)
1.
सामान्य उद्देश्य-
छात्रों में हिंदी गद्य (विशेषकर ललित निबंध विधा) के प्रति रुचि और
समझ उत्पन्न करना।
छात्रों को हिंदी भाषा के मानक रूप, गद्य शैली और
व्याकरण-सम्मत वाक्य संरचना से परिचित कराना।
विद्यार्थियों के शब्द भंडार में वृद्धि करना तथा कठिन गद्यांशों का
भाव समझने योग्य बनाना।
2.
विशिष्ट
उद्देश्य-
ज्ञानात्मक
-
·
छात्र निबंधकार पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी के जीवन, उनकी साहित्यिक शैली और हिंदी निबंध के इतिहास में
उनके योगदान को जान सकेंगे।
·
विद्यार्थी निबंध लेखन के दो मुख्य अंगों—सामग्री
(विचार-समूह) और शैली (भाषा का प्रवाह) के वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझ सकेंगे।
·
छात्र ए.जी. गार्डिनर जैसे पाश्चात्य विचारकों के
लेखन संबंधी दृष्टिकोण (मानसिक स्थिति और प्रेरणा का महत्व) से परिचित हो सकेंगे।
बोधात्मक
-
·
विद्यार्थी यह समझ पाएंगे कि लेखन एक कला है, जिसमें केवल विषय चुनना काफी नहीं होता बल्कि उसके
लिए गंभीर चिंतन, रूपरेखा
और परिश्रम की आवश्यकता होती है।
·
छात्र निबंध में उल्लिखित प्रसिद्ध लोकोक्ति 'दूर के
ढोल सुहावने होते हैं' के वास्तविक दार्शनिक और व्यावहारिक अर्थ को समझ
सकेंगे।
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विद्यार्थी समाज-सुधार और परंपराओं के बीच के
द्वंद्व (पुरानी और नई पीढ़ी के विचारों का अंतर) को समझ पाएंगे।
प्रयोगात्मक
-
·
छात्र किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले उसकी
व्यवस्थित रूपरेखा तैयार
करने का कौशल सीख सकेंगे।
·
विद्यार्थी अपने दैनिक जीवन या परीक्षाओं में किसी
भी गंभीर या साधारण विषय पर अपने मौलिक विचारों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त
करने में सक्षम होंगे।
3. पूर्व ज्ञान
(Assumed prior knowledge)-
1. गद्य
विधा और निबंध लेखन की बुनियादी समझ
·
निबंध का व्यावहारिक अनुभव
·
निबंध के अंगों की सामान्य जानकारी: वे जानते हैं कि एक मानक निबंध में प्रस्तावना
(भूमिका), मुख्य विषय-वस्तु
और उपसंहार (निष्कर्ष) जैसे हिस्से होते हैं।
·
गद्य और पद्य में अंतर: छात्र कहानी, निबंध और
नाटक (गद्य) को कविता (पद्य) से अलग पहचानने में सक्षम हैं।
4. अपेक्षित शिक्षण प्रतिफल (Expected Learning Outcomes)-
1. ज्ञानात्मक
प्रतिफल-
·
छात्र निबंधकार पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की
भाषा-शैली (विचारात्मक और ललित) को पहचान सकेंगे।
·
विद्यार्थी निबंध लेखन की प्रक्रिया में 'विषय की
महत्ता'
और 'मानसिक
स्थिति'
के
अंतर्संबंध को स्पष्ट कर सकेंगे।
·
छात्र पाश्चात्य विद्वान ए.जी. गार्डिनर के निबंध
लेखन संबंधी दृष्टिकोण को अपने शब्दों में बता सकेंगे।
2. कौशल-आधारित
प्रतिफल-
·
लेखन कौशल: छात्र किसी भी साधारण या गंभीर विषय पर बिना झिझक के
एक सुव्यवस्थित रूपरेखा तैयार कर पाएंगे।
·
विश्लेषणात्मक कौशल: विद्यार्थी निबंध में प्रयुक्त मुहावरों और
लोकोक्तियों (जैसे: 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं') का
संदर्भ सहित विश्लेषण कर सकेंगे।
·
तार्किक क्षमता: छात्र 'पुरानी
पीढ़ी के अनुभव' और 'नई पीढ़ी के उत्साह'
के
बीच के द्वंद्व पर अपने तार्किक विचार प्रकट कर सकेंगे।
3. व्यावहारिक
एवं प्रयोगात्मक प्रतिफल-
·
छात्र परीक्षा या दैनिक जीवन में रटे-रटाए विषयों से
हटकर मौलिक और रचनात्मक लेखन कर
सकेंगे।
·
विद्यार्थी समाज-सुधार और परंपराओं के महत्व को
समझते हुए दोनों के प्रति एक संतुलित और प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाएंगे।
·
छात्र किसी भी नई समस्या या स्थिति के दोनों पक्षों
(सकारात्मक और नकारात्मक) पर निष्पक्ष सोच विकसित कर सकेंगे।
5. शिक्षण-सहायक
सामग्री
- पाठ्यपुस्तक
- श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड)
- चित्र/स्लाइड
- कार्यपत्रक
- ऑडियो या वीडियो क्लिप (यदि उपलब्ध हो)
6.सारांश (summary)-
विधा : निबंध
भाषा: खड़ी बोली
शैली · व्यंग्यात्मक और विवेचनात्मक
'क्या
लिखूँ?'
पदुमलाल
पुन्नालाल बख्शी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध विचारात्मक निबंध है, जिसमें लेखक अमिता और ज्योत्स्ना नाम की दो लड़कियों
की फरमाइश पर क्रमशः 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' और 'समाज-सुधार' विषयों
पर निबंध लिखने की अपनी दुविधा को व्यक्त करते हैं। लेखक ए.जी. गार्डिनर के हवाले
से बताते हैं कि निबंध लेखन के लिए विषय से ज़्यादा लेखक की मानसिक स्थिति, गंभीर चिंतन और विषय-सामग्री के साथ एक प्रभावशाली
प्रवाहपूर्ण शैली का होना अनिवार्य है। निबंध में वे स्पष्ट करते हैं कि वर्तमान
से असंतुष्ट होने के कारण जहाँ वृद्धों को अतीत सुहावना लगता है, वहीं युवाओं को भविष्य रंगीन नजर आता है, जिसके कारण पुरानी और नई पीढ़ी के विचारों में
समाज-सुधार को लेकर हमेशा एक द्वंद्व (वैचारिक टकराव) चलता रहता है और यही टकराव
समाज की प्रगति का मुख्य आधार बनता है।
7. कौशल विकास (skill developed)-
·
रचनात्मक लेखन कौशल : विद्यार्थी
रटे-रटाए विषयों से अलग हटकर किसी भी साधारण विषय पर अपनी कल्पना और मौलिक विचारों
के आधार पर नया और आकर्षक निबंध लिखने की कला सीखते हैं।
·
समीक्षात्मक एवं तार्किक चिंतन : छात्र
किसी भी विषय या समस्या के दोनों पहलुओं (जैसे- अतीत बनाम भविष्य, या पुरानी पीढ़ी बनाम नई पीढ़ी) पर निष्पक्ष होकर और
तर्क के साथ सोचना शुरू करते हैं।
· अभिव्यक्ति
कौशल : विद्यार्थियों
में अपने मन के जटिल विचारों को क्रमबद्ध,
सुगठित और प्रभावशाली वाक्यों के माध्यम से दूसरों
के सामने प्रकट करने की योग्यता विकसित होती है।
·
भाषाई विश्लेषण कौशल : गद्य में
प्रयुक्त लोकोक्तियों (जैसे: 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं') और
मुहावरों का सही संदर्भ पहचानकर उनका व्यावहारिक जीवन में उपयोग करने का कौशल
बढ़ता है।
· समस्या
समाधान कौशल :
निबंध
में आए 'पीढ़ियों
के टकराव' और 'समाज-सुधार' के
प्रसंग को समझकर छात्र पुरानी परंपराओं और नए विचारों के बीच संतुलन स्थापित करना
(सामंजस्य बिठाना) सीखते हैं।
8.क्रिया
कलाप (Activity)-
तात्कालिक
विचार-मंथन और लेखन-
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प्रक्रिया: शिक्षक श्यामपट्ट पर कोई भी एक साधारण विषय (जैसे: 'यदि
मोबाइल न होता'
या 'मेरी
पुरानी साइकिल')
लिखेंगे।
सभी छात्रों को निबंधकार बख्शी जी के सिद्धांत के अनुसार, बिना किसी पूर्व तैयारी के उस विषय पर तुरंत अपने
मौलिक विचारों का एक संक्षिप्त पैराग्राफ (4-5 पंक्तियाँ)
लिखने को कहा जाएगा।
·
लाभ:
इससे
छात्रों की रचनात्मक सोच और तत्काल लिखने के कौशल का विकास होगा।
9.गृहकार्य (homework)-
पाठ में प्रयुक्त प्रसिद्ध लोकोक्ति 'दूर के
ढोल सुहावने होते हैं' का अर्थ स्पष्ट करते हुए, इसके पक्ष या विपक्ष में अपने विचारों को 80-100 शब्दों में लिखिए।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-उत्तर पुस्तिका में करेंगे।
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