⁠दो बैलों की कथा || Class 9 || Ganga || New NCERT || New Syllabus || HINDI TEXTBOOK BACK EXERCISE || गद्य-खंड || Question Answers || NCERT SOLUTIONS

 

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क-

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?

(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता

(ख) एकता और सहयोग

(ग) गर्व और दंभ

(घ) विद्रोह और क्रोध

उत्तर: (ख) एकता और सहयोग

तर्क: दोनों बैल हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ देते हैं - चाहे साँड़ से लड़ाई हो, दीवार तोड़नी हो या काँजीहाउस में मोती का हीरा को छोड़कर न जाना - यही सच्ची एकता है।

2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?

(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।

(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।

(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।

(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।

उत्तर: (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा

तर्क: जब झूरी ने उन्हें अपने साले गया के साथ भेजा, तो बैलों को लगा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया है।वे अपने मालिक से बहुत प्यार करते थे तथा उस घर को अपना समझते थे इसलिए किसी और के हाथ बेचे जाने की बात उनके स्वाभिमान को ठेस पहुँचा रही थी।

3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?

(क) कष्टों से बचने के लिए

(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए

(ग) अभिमान की रक्षा के लिए

(घ) अपनापन पाने के लिए

उत्तर: (घ) अपनापन पाने के लिए

तर्क: हीरा और मोती के लिए झूरी का घर सिर्फ रहने की जगह नहीं थी, बल्कि वहाँ उन्हें प्रेम और सम्मान मिलता था। गया के घर में उन्हें वह 'अपनापन' नहीं मिला; वहाँ उन्हें केवल रूखा सूखा भूसा और कठोर व्यवहार मिला।

4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?

(क) स्वाभिमान

(ख) अहिंसा

(ग) पराधीनता

(घ) अन्याय की रक्षा

उत्तर: (क) स्वाभिमान

तर्क: गया द्वारा डंडे से मारे जाने पर मोती का क्रोधित होना और हल लेकर भागने की कोशिश करना उसके स्वाभिमान और अन्याय के प्रति विरोध को दर्शाता है। पशु होने के बावजूद, वह अपमानजनक व्यवहार और बिना कारण की मार सहन नहीं कर सकता था।यह मानवीय प्रवृत्ति है कि जब किसी के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है, तो वह प्रतिशोध या विरोध के लिए आतुर हो जाता है।

 

5. कहानी में बैलों की 'मूक-भाषा' का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?

(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए

(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए

(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए

(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए

उत्तर: (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए

तर्क: जानवरों में भी मनुष्यों की तरह गहरी संवेदनाएं, विचार और भावनाएं होती हैं। वे एक-दूसरे के मन की बात समझ लेते थे, जो उनकी उच्च मानसिक और भावनात्मक चेतना को दर्शाता है। यह प्रयोग यह भी सिद्ध करता है कि मित्रता और प्रेम की कोई भाषा नहीं होती।

6. 'दो बैलों की कथा' को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?

(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के

(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के

(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के

(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के

उत्तर: (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के

तर्क: प्रेमचंद ने यह कहानी उस समय लिखी थी जब भारत का स्वतंत्रता संग्राम चरम पर था। हीरा और मोती का बार-बार कैद होना (गया के यहाँ, कांजीहौस में) और हर बार विरोध कर आजाद होने का प्रयास करना, असल में भारतीय जनता के संघर्ष को दर्शाता है।

 

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

 

1. "दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?

उत्तर: बैलों ने नए मालिक के यहाँ काम करने से इसलिए इनकार किया क्योंकि - पहली बात यह थी कि उन्हें लगा उन्हें बेच दिया गया है, जो उनके लिए अपमानजनक था। दूसरे, गया ने उनके साथ प्रेम और सम्मान का व्यवहार नहीं किया। तीसरे, उनका हृदय झूरी के घर में था - वह जगह उनकी अपनी थी। बिना अपनेपन के काम करना उन्हें स्वीकार नहीं था। यह उनके स्वाभिमान और वफादारी का प्रमाण है।

 

2. "गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।" बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?

उत्तर: बैलों का झूरी के घर वापस लौटना एक साधारण घटना नहीं बल्कि उनके अदम्य साहस और प्रेम का प्रतीक था क्योंकि:

1.    शक्ति और विद्रोह का परिचय: उन्होंने गया के घर की दासता को ठुकराते हुए अत्यंत मजबूत रस्सियाँ एक ही झटके में तोड़ दीं। यह न केवल उनकी शारीरिक शक्ति बल्कि उनकी स्वतंत्रता की तीव्र इच्छा का भी प्रमाण था।

2.    विलक्षण बुद्धि और दिशा-ज्ञान: बिना किसी मार्गदर्शन के, अपरिचित रास्तों और रात के अंधेरे को पार कर वे सीधे अपने घर पहुँचे। यह उनकी तीव्र स्मरण शक्ति और सहज बुद्धि को दर्शाता है।

3.    भावनात्मक वफादारी: उनका वापस आना झूरी के प्रति उनके मूक प्रेम और अटूट निष्ठा का प्रतीक था, जिसने गाँव वालों के दिलों को छू लिया।

 

3. "मोती ने मूक-भाषा में कहा- अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!" 'कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है' इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।

उत्तर: 'संघर्ष की अनिवार्यता' को सिद्ध करने वाले उदाहरण:

·       अत्याचार के विरुद्ध आवाज़: जब गया ने उन्हें अकारण मारा और भूखा रखा

·       आत्मरक्षा के लिए एकजुटता: साँड़ के हमले के समय भागने के बजाय दोनों ने मिलकर संघर्ष किया।

·       परोपकार और स्वतंत्रता: काँजीहौस की दीवार तोड़ना संघर्ष का चरम था। मोती ने भारी जोखिम उठाकर अन्य जानवरों को आज़ाद कराया, जिससे स्पष्ट होता है कि बिना संघर्ष के मुक्ति पाना असंभव है।

·       अंतिम प्रयास (कसाई से बचाव): अंत में कसाई के चंगुल से छूटने के लिए उन्होंने अपनी पूरी शक्ति लगा दी, जो यह बताता है कि अंतिम क्षण तक संघर्ष करने से ही लक्ष्य प्राप्त होता है।

 

4. "जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया..." हीरा एवं मोती 'स्वतंत्रता' और 'अपनापन' दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।

उत्तर: हीरा और मोती 'अपनेपन' की भावना से अधिक प्रेरित थे। यद्यपि उन्हें स्वतंत्रता प्रिय थी, लेकिन उनके लिए आजादी का अर्थ केवल स्वच्छंदता नहीं, बल्कि झूरी का स्नेह था। इसीलिए काँजीहौस से छूटने के बाद वे किसी सुरक्षित जंगल या अज्ञात स्थान पर जाने के बजाय सीधे झूरी के 'थान' पर पहुँचे। उनके लिए मालिक का प्रेम और घर का लगाव किसी भी प्रकार की बेलगाम आजादी से बड़ा था।

5. "बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" 'अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है'- क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।

उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। अन्याय को मौन रहकर सहना अत्याचारी के दुष्कर्मों को मौन स्वीकृति देने के समान है। यदि हीरा-मोती गया की प्रताड़ना को चुपचाप सहते रहते, तो उनका शोषण कभी समाप्त नहीं होता। उनके द्वारा किया गया वैचारिक और शारीरिक विद्रोह ही उनके आत्म-सम्मान की ढाल बना। यह सिद्ध करता है कि प्रतिरोध ही परिवर्तन की पहली सीढ़ी है और बिना संघर्ष के न तो दासता की बेड़ियाँ टूटती हैं, न ही सम्मान प्राप्त होता है।

 

6. "बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।" हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।

उत्तर: हीरा और मोती की अभिन्न मित्रता को दर्शाने वाले तीन प्रमुख बिंदु:

·       निस्वार्थ भाव: हल या गाड़ी खींचते समय दोनों की यह कोशिश रहती थी कि ज्यादा बोझ उनके अपने कंधे पर रहे ताकि दूसरे को आराम मिले।

·       संकट में साथ (साँड़ से युद्ध): विशाल साँड़ का सामना करते समय दोनों ने भागने के बजाय मिलकर वार किया और एक-दूसरे की रक्षा करते हुए उसे परास्त किया।

·       काँजीहौस का त्याग: जब हीरा रस्सी से बँधा होने के कारण नहीं भाग सका, तो मोती उसे अकेला छोड़कर नहीं गया और साथ में सजा भुगतना स्वीकार किया।

 

7. "उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।" कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।

उत्तर: कहानी में मालकिन और छोटी लड़की के व्यवहार में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

मालकिन का व्यवहार भावनात्मक तो है, लेकिन वह क्षणिक और औपचारिक लगता है। जब वह आकर बैलों के माथे चूमती है, तो यह उसके अंदर अचानक जागी दया और स्नेह को दर्शाता है। परंतु यह प्यार गहरा और स्थायी नहीं लगता, बल्कि परिस्थिति के अनुसार प्रकट हुआ भाव है।

इसके विपरीत, छोटी लड़की का व्यवहार निष्कपट, स्वाभाविक और सच्चे प्रेम से भरा हुआ है। वह बैलों के दर्द को बिना बोले समझती है और उनके प्रति उसका लगाव गहरा और सच्चा है। उसका स्नेह किसी दिखावे या मौके पर आधारित नहीं, बल्कि दिल से जुड़ा हुआ है।

तुलना:

  • मालकिन का प्रेम क्षणिक और औपचारिक है।
  • छोटी लड़की का प्रेम सच्चा, गहरा और निस्वार्थ है।

अतः कहा जा सकता है कि छोटी लड़की का व्यवहार अधिक मानवीय और संवेदनशील है, जबकि मालकिन का व्यवहार अपेक्षाकृत ऊपरी और परिस्थितिजन्य है।

 

3. कहानी का नया अंत

यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए।

कैसे लिखें-

बैलों की नई जगह।

झूरी की स्थिति।

(संकेत- "हीरा और मोती अब एक बूढ़े किसान के घर शांति से रह रहे हैं।" )

उत्तर: यदि हीरा और मोती वापस झूरी के पास न लौटते, तो कहानी का अंत कुछ इस प्रकार हो सकता था—

हीरा और मोती अब एक बूढ़े किसान के घर शांति से रह रहे हैं। वह किसान गरीब जरूर था, लेकिन बहुत दयालु और पशु-प्रेमी था। वह दोनों बैलों को भरपेट खाना देता, उन्हें प्यार से सहलाता और फिर उनसे उनके सामर्थ्य के अनुसार काम लेता। बैल भी वहाँ सुरक्षित और संतुष्ट महसूस करते थे। धीरे-धीरे उन्होंने उस किसान को ही अपना मालिक मान लिया और उसके साथ अपना नया जीवन शुरू कर दिया।

उधर झूरी अपने बैलों के बिना बहुत दुखी था। उसे अपनी गलती का एहसास हो रहा था कि उसने उन्हें बेचा क्यों। वह रोज उन्हें याद करता और उम्मीद करता कि शायद वे लौट आएँ। उसका घर और खेत अब सूने लगने लगे थे। वह अक्सर गाँव वालों से उनके बारे में पूछता, लेकिन कोई खबzर नहीं मिलती।

इस प्रकार, कहानी का अंत इस संदेश के साथ होता कि सच्चा प्रेम और दया जहाँ मिलती है, वहीं जीवन में शांति और संतोष मिलता है।

4. चित्रकथा लेखन

नीचे 'दो बैलों की कथा' की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए। प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम दोनों वाक्य लिखिए।

कैसे लिखें-

हर चित्र के लिए एक छोटा संवाद बनाकर लिखिए।

क्रम का ध्यान रखें- बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आज़ादी।

(संकेत- चित्र 4: "अब हम आज़ाद हैं!")

उत्तर:

 

 

मेरी कल्पना मेरे अनुमान-

 

1."उसने उनके माथे सहलाए और बोली खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ..." यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?

 

उत्तर: अगर मैं उस छोटी लड़की की जगह होती, तो मैं भी लगभग वैसा ही करती जैसा उसने किया, लेकिन कुछ बातों का और ध्यान रखती:

१. सही समय का इंतज़ार: मैं तब तक इंतज़ार करती जब तक घर के सभी लोग गहरी नींद में न सो जाते, ताकि बैलों के भागते समय शोर होने पर भी कोई तुरंत जाग न सके।
२. चुपके से रस्सियाँ खोलना: मैं बहुत सावधानी से उनकी रस्सियाँ खोलती ताकि वे बिना किसी आहट के आज़ाद हो सकें।
३. रास्ते का मार्गदर्शन: मैं उन्हें इशारे से उस सुरक्षित रास्ते की ओर मोड़ देती जो उन्हें उनके असली मालिक (झूरी) के घर की तरफ ले जाता।
४. साक्ष्य मिटाना: रस्सियाँ खोलने के बाद मैं खूँटे के पास की स्थिति वैसी ही कर देती जैसी पहले थी, ताकि किसी को तुरंत शक न हो कि उन्हें किसी ने जानबूझकर छोड़ा है।

कुल मिलाकर, मेरा उद्देश्य उन्हें सुरक्षित और बिना किसी बाधा के वहाँ से निकालना होता, क्योंकि उस मासूम बच्ची की तरह मैं भी उनकी तकलीफ को महसूस कर पाती।

 

2."दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।" भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।

उत्तर-   हाँ, मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ कि भय और संकोच मनुष्य की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा होते हैं और अक्सर अवसर मिलने पर भी उसे कदम बढ़ाने से रोक देते हैं।

'दो बैलों की कथा' के संदर्भ में और व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर इसके तर्क निम्नलिखित हैं:

कहानी के संदर्भ में (कांजीहौस का उदाहरण):
जब मोती ने कांजीहौस की दीवार तोड़ दी और सभी जानवर भाग गए, तब भी दोनों गधे वहीं खड़े रहे। जब मोती ने उनसे भागने को कहा, तो उन्होंने उत्तर दिया कि "फिर पकड़ लिए गए तो?" और "हमें डर लगता है।"

·       तर्क: यहाँ गधों का भय उनकी आजादी की इच्छा से बड़ा था। उन्हें सुरक्षित रहने (चाहे वह कैद ही क्यों न हो) का इतना अभ्यास हो गया था कि उन्होंने स्वतंत्रता के जोखिम को स्वीकार करने के बजाय बंदी बने रहना बेहतर समझा।

अपने अनुभवों के आधार पर:
हमारे जीवन में भी कई बार ऐसे अवसर आते हैं जब हम 'संकोच' के कारण पीछे हट जाते हैं। उदाहरण के तौर पर:

1.    कक्षा में प्रश्न पूछना: कई विद्यार्थी उत्तर जानते हुए भी या संदेह होने पर भी इस 'भय' से प्रश्न नहीं पूछते कि दूसरे छात्र उन पर हँसेंगे। यह संकोच उन्हें सीखने के अवसर से वंचित कर देता है।

2.    मंच पर बोलना : किसी कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिलने पर भी कई लोग इस 'डर' से पीछे हट जाते हैं कि वे असफल हो जाएंगे या उनसे गलती हो जाएगी।

निष्कर्ष:
यह मानसिकता दर्शाती है कि बाहरी जंजीरों (रस्सी या दीवार) से अधिक खतरनाक मानसिक जंजीरें होती हैं। जो व्यक्ति जोखिम लेने के भय और "लोग क्या कहेंगे" के संकोच को पार कर लेता है, वही सफलता और स्वतंत्रता प्राप्त कर पाता है।

 

मेरे अनुभव मेरे विचार-

1."दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।" क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।

उत्तर: हाँ, मैं लेखक के इस विचार से पूरी तरह सहमत हूँ। मित्रता में 'धौल-धप्पा' (हँसी-मजाक, नोंक-झोंक या हल्की खींचतान) केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि रिश्तों की गहराई का पैमाना है।

मुझे ऐसा इन कारणों से लगता है:

1. विश्वास और सहजता:
दोस्ती में धौल-धप्पा तभी होता है जब दो लोगों के बीच पूरी सहजता हो। जहाँ बहुत अधिक औपचारिकता होती है, वहाँ रिश्ता 'फुसफुसा' या साधारण-सा लगता है क्योंकि वहाँ हम अपनी कमियों या शरारतों को छिपाने की कोशिश करते हैं। जब हम किसी दोस्त पर हाथ रखते हैं या मज़ाक करते हैं, तो यह संकेत होता है कि हमें उस पर अटूट विश्वास है कि वह बुरा नहीं मानेगा।

2. मन का बोझ हल्का होना:
हीरा और मोती भी जब एक-दूसरे से सींग मिलाते थे, तो वह लड़ाई नहीं बल्कि प्रेम प्रदर्शन था। वास्तविक जीवन में भी, जब हम दोस्तों के साथ खुलकर हँसते-खिंचते हैं, तो तनाव दूर होता है। औपचारिक बातचीत से मन उतना हल्का नहीं होता जितना 'धौल-धप्पे' वाली मस्ती से होता है।

3. संकट में मजबूती:
लेखक का कहना सही है कि जिस दोस्ती में ऐसी गहराई नहीं होती, उस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता। जो दोस्त मज़ाक सहने की हिम्मत रखता है, वही अक्सर मुश्किल समय में सीना तानकर खड़ा भी रहता है। बिना नोक-झोंक वाली दोस्ती अक्सर स्वार्थ या शिष्टाचार तक सीमित रह जाती है और संकट आने पर टूट सकती है।

निजी अनुभव का उदाहरण:
अक्सर हमारे सबसे गहरे मित्र वही होते हैं जिनसे हमारा सबसे ज्यादा झगड़ा या मज़ाक होता है। जिस दोस्त से हम "जी-आप" करके बात करते हैं, उसके पास मदद माँगने में संकोच होता है। लेकिन जिस दोस्त के साथ हम मज़ाक करते हैं, उसे हम आधी रात को भी बिना झिझक फोन कर सकते हैं।

 

2)"हीरा ने तिरस्कार किया- गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।" "यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।" आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं- हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?

उत्तर:यह प्रश्न नैतिकता और व्यावहारिकता के बीच के द्वंद्व को दर्शाता है। इस संदर्भ में मेरे विचार और पक्ष निम्नलिखित हैं:

मैं हीरा और मोती दोनों के विचारों के समन्वय (तालमेल) के साथ हूँ, लेकिन एक आदर्श स्थिति में हीरा का पक्ष अधिक महान लगता है।

हीरा के पक्ष में तर्क (नैतिकता):
हीरा का मानना है कि "गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।" यह उच्च मानवीय मूल्यों और युद्ध की नैतिकता का प्रतीक है।

·       यह हमें सिखाता है कि वीरता केवल जीतने में नहीं, बल्कि दया दिखाने में भी है।

·       यदि हम अपने दुश्मन के समान ही क्रूर हो जाएं, तो हमारे और उसमें कोई अंतर नहीं रह जाएगा। हीरा का यह दृष्टिकोण 'सत्याग्रह' और 'क्षमा' का प्रतिनिधित्व करता है।

मोती के पक्ष में तर्क (व्यावहारिकता):
मोती का कहना है कि "बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।" यह आत्मरक्षा और व्यावहारिकता का प्रतीक है।

·       मोती का तर्क है कि यदि शत्रु को जीवित या सक्षम छोड़ दिया गया, तो वह पलटवार कर सकता है और फिर से संकट पैदा कर सकता है।

·       अन्याय और क्रूरता को जड़ से खत्म करने के लिए कभी-कभी कठोर होना आवश्यक होता है।

निष्कर्ष:
मेरे विचार से, जीवन में समय और परिस्थिति के अनुसार दोनों की आवश्यकता है।

·       जहाँ तक संभव हो, हमें हीरा की तरह मर्यादा और दया रखनी चाहिए, क्योंकि यही हमें श्रेष्ठ बनाती है।

·       किंतु, यदि शत्रु बहुत अधिक धूर्त और क्रूर हो (जैसे गया या कसाई), तो वहाँ मोती की दृढ़ता जरूरी हो जाती है ताकि खुद की और अपनों की रक्षा की जा सके।

अंततः, हीरा का आदर्शवाद समाज को दिशा देता है, जबकि मोती की आक्रामकता उसे सुरक्षित रखती है।

 

 

3.      "हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?" क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।

उत्तर- हीरा और मोती का यह संवाद सच्ची मित्रता और त्याग की पराकाष्ठा है। जब कांजीहौस की दीवार टूटने पर हीरा की रस्सी नहीं खुली, तो मोती उसे अकेला छोड़कर भाग सकता था, लेकिन उसने विपत्ति में साथ रहना चुना।

मेरे जीवन की भी एक ऐसी घटना है जिसने मुझे सिखाया कि संगठित शक्ति किसी भी चुनौती को हरा सकती है:

घटना:
मेरे विद्यालय के समय की बात है, जब हमने एक विज्ञान प्रदर्शनी के लिए एक जटिल वर्किंग मॉडल तैयार किया था। प्रदर्शनी शुरू होने से ठीक एक घंटे पहले, तकनीकी गड़बड़ी के कारण हमारा मॉडल अचानक बंद हो गया।

चुनौती और साथ:

मैं पूरी तरह हताश हो चुका था और मुझे लगा कि हमारी हफ़्तों की मेहनत बेकार गई। तब मेरे मित्र ने मुझसे वही कहा जो मोती ने हीरा से कहा था—"हम साथ मिलकर इसे ठीक करेंगे, हार नहीं मानेंगे।" हमने मिलकर कमियों को ढूँढना शुरू किया। जहाँ मैं सर्किट जोड़ रहा था, वहीं मेरा मित्र कोडिंग और स्ट्रक्चर को संभाल रहा था।

परिणाम:
अंततः, प्रदर्शनी शुरू होने से मात्र 10 मिनट पहले मॉडल फिर से चलने लगा। उस दिन हमने न केवल पुरस्कार जीता, बल्कि यह भी सीखा कि जब दो लोग एक-दूसरे पर विश्वास करते हैं और विपत्ति में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं, तो बड़ी से बड़ी बाधा को पार किया जा सकता है।

निष्कर्ष:
हीरा और मोती की तरह, इंसानी रिश्तों में भी संकट के समय साथ खड़े रहना ही रिश्ते की असली पहचान होती है। जो मित्र केवल सुख के साथी होते हैं, वे 'फुसफुसी' दोस्ती वाले होते हैं, लेकिन विपत्ति के साथी ही जीवन भर की यादें और भरोसा बनते हैं।

 

 

 

 

पशुओं के लिए कानून

 

नीचे दिए गए संवाद पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

 

"मैं तो समझता हूँ, चुराए लिए आते हो। चुपके से चले जाओ। मेरे बैल हैं। मैं बेचूँगा, तो बिकेंगे। किसी को मेरे बैल नीलाम करने का क्या अख्तियार है।"

"जाकर थाने में रपट कर दूँगा।"

"मेरे बैल हैं। इसका सबूत यह है कि मेरे द्वार पर खड़े हैं। "

 

1.बैलों का कॉजीहौस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?

2.यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?

3.मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए।

(संकेत "धानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम... है। हमारे साथ अन्याय हुआ है...।")

 

उत्तर:

1. बैलों का कांजीहौस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है।

यह स्थिति एक ही सिक्के के दो पहलुओं की तरह है:

·       अन्याय: कांजीहौस में बंद होना अन्याय इसलिए है क्योंकि हीरा-मोती कोई अपराधी नहीं थे। वे तो केवल भूख से व्याकुल होकर मटर के खेत में चले गए थे। वहां उनके साथ जो व्यवहार हुआ—खाना न देना, उन्हें बांध कर रखना और अंत में उन्हें कसाई को बेच देना—यह पशुओं के प्रति क्रूरता और सरासर अन्याय है।

·       न्याय: कानून की दृष्टि से कांजीहौस लावारिस या खेत चरने वाले पशुओं को रखने का स्थान था ताकि वे फसलों का नुकसान न करें। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसानों की फसल की रक्षा करना था। अतः, नियम के अनुसार पकड़े जाना 'न्याय' की प्रक्रिया का हिस्सा था, लेकिन उसके बाद उनके साथ होने वाला अमानवीय व्यवहार इसे पूरी तरह 'अन्याय' बना देता है।

2. यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?

उत्तर: बैलों की सुरक्षा और सम्मान के लिए मैं निम्नलिखित अधिकारों की माँग करूँगा:

1.    भरपेट भोजन और पानी का अधिकार: किसी भी स्थिति में पशुओं को भूखा रखना कानूनी अपराध होना चाहिए।

2.    क्रूरता के विरुद्ध अधिकार: बिना कारण पीटना या भारी रस्सियों से बांधना प्रतिबंधित हो।

3.    स्वच्छ आवास का अधिकार: कांजीहौस जैसे स्थानों पर सफाई और पर्याप्त स्थान अनिवार्य हो।

4.    पहचान का अधिकार: यदि किसी का पालतू पशु गुम हो जाए, तो उसे नीलाम करने से पहले उसके असली मालिक को खोजने का उचित समय और प्रयास किया जाना चाहिए।

3. शिकायत पत्र (थानाध्यक्ष को)


थानाध्यक्ष महोदय,
सदर थाना,

…………

.............

विषय: हमारे साथ हुए अन्याय और अवैध नीलामी की शिकायत।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारा नाम हीरा और मोती है। हम झूरी काछी के बैल हैं। हम आपके ध्यान में हमारे साथ हुए घोर अन्याय को लाना चाहते हैं। हमें धोखे से मटर के खेत में पकड़कर कांजीहौस में बंद कर दिया गया, जहाँ हमें कई दिनों तक भूखा-प्यासा रखा गया।

सबसे बड़ा अन्याय तब हुआ जब एक कसाई ने हमें अवैध रूप से नीलाम कर दिया, जबकि हम लावारिस नहीं हैं। हमारे असली मालिक झूरी हैं और इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि हम अपने आप उनके द्वार पर वापस पहुँच गए हैं। दढ़ियल (कसाई) हमें जबरन ले जाने की कोशिश कर रहा है और हमें जान से मारने की धमकी दे रहा है।

अतः आपसे प्रार्थना है कि इस मामले की जाँच करें और हमें सुरक्षा प्रदान करें ताकि हम अपने असली मालिक के पास शांति से रह सकें।

प्रार्थी,
हीरा और मोती
(
झूरी के बैल)

 

 

हमारी धरोहर और संस्कृति

 

1."वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें। "

 

कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। ये कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?

 

उत्तर: अगर कहानी के अनुसार हीरा और मोती कभी भी अपने मालिक के प्रति विश्वासघात नहीं करते थे। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?

उत्तर: 'दो बैलों की कथा' के आधार पर हीरा और मोती के कुछ अटूट सिद्धांत और मूल्य थे, जिन्हें वे अपना 'धर्म' मानते थे। उनके अनुसार निम्नलिखित कार्य करने योग्य नहीं थे और वे इन्हें कभी नहीं करते थे:

1.    निहत्थे या गिरे हुए शत्रु पर वार न करना: हीरा का यह स्पष्ट मत था कि यदि शत्रु गिर जाए या शरण में आ जाए, तो उस पर सींग नहीं चलाना चाहिए (जैसे उन्होंने सांड को हराने के बाद उसे जीवित छोड़ दिया)।

2.    स्त्रियों पर वार न करना: कहानी में एक प्रसंग आता है जहाँ मोती गया की पत्नी या उस घर की औरत को सबक सिखाना चाहता है, लेकिन हीरा उसे याद दिलाता है कि "औरत जात पर सींग चलाना मना है।" यह उनकी संस्कृति और नारी के प्रति सम्मान को दर्शाता है।

स्वार्थ के लिए साथी को अकेला न छोड़ना: कांजीहौस में जब हीरा बंधा रह गया, तो मोती अवसर मिलने पर भी उसे छोड़कर नहीं भागा। अपने साथी के प्रति वफादारी उनके लिए सर्वोपरि थी।

अन्याय के आगे घुटने न टेकना: उन्होंने कभी भी अन्यायपूर्ण तरीके से गुलामी स्वीकार नहीं की। चाहे भूखा रहना पड़े, लेकिन उन्होंने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया।

निष्कर्ष: हीरा-मोती के ये कार्य दर्शाते हैं कि वे केवल पशु नहीं थे, बल्कि उच्च मानवीय आदर्शों और मर्यादाओं के प्रतीक थे।

 

2."गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।"

"लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।"

हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?

उत्तर - हीरा के ये दो कथन भारतीय संस्कृति के उच्च नैतिक सिद्धांतों की ओर संकेत करते हैं:

·       युद्ध की मर्यादा और दया: "गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए" यह कथन शरणगत की रक्षा और युद्ध नीति का परिचायक है। यह भारतीय मूल्य सिखाता है कि वीरता तभी तक शोभा देती है जब तक वह मर्यादा में हो। निहत्थे या पराजित शत्रु पर प्रहार करना कायरता मानी जाती है।

·       नारी सम्मान: "औरत जात पर सींग चलाना मना है" यह कथन 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते' (जहाँ नारी की पूजा होती है वहाँ देवता निवास करते हैं) के सिद्धांत को दर्शाता है। भारतीय समाज में पशुओं तक को यह संस्कार दिए गए हैं कि वे महिलाओं पर वार न करे। यह शक्ति के सही उपयोग और कमजोर के प्रति सुरक्षा की भावना का प्रतीक है।

 

3.(क) "दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता"

(क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।

उत्तर: कृषि के पारंपरिक और आधुनिक उपकरण-

कृषि के क्षेत्र में समय के साथ उपकरणों में बहुत बदलाव आए हैं। इनके मुख्य अंतर नीचे दिए गए हैं:

पारंपरिक उपकरण:

1.    हल (Plough): बैलों की मदद से मिट्टी को खोदने और पलटने के काम आता है।

2.    कुदाल और फावड़ा (Hoe and Spade): मिट्टी खोदने, खरपतवार निकालने और क्यारियाँ बनाने के लिए।

3.    खुरपी (Trowel): पौधों के पास से घास निकालने (निराई) के काम आती है।

आधुनिक उपकरण (Modern Tools):

1.    ट्रैक्टर (Tractor): यह आधुनिक खेती का आधार है, जो कई मशीनों को खींचने और चलाने का काम करता है।

2.    कल्टीवेटर (Cultivator): ट्रैक्टर के पीछे लगा होता है, जो हल की तुलना में बहुत तेजी से मिट्टी की जुताई करता है।

3.    सीड ड्रिल (Seed Drill): बीजों को सही गहराई और निश्चित दूरी पर बोने के लिए।

 

 

(ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते है?

उत्तर:

भारत में बैल केवल पशु नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था और संस्कृति के आधार स्तंभ रहे हैं। गाँवों और शहरों में उनकी उपयोगिता इस प्रकार है:

भारतीय गाँवों में उपयोग:

1.    खेती के मुख्य आधार: ट्रैक्टर के प्रसार के बावजूद, आज भी छोटे किसान जुताई, बुवाई और पाटा चलाने (मिट्टी समतल करने) के लिए बैलों पर निर्भर हैं।

2.    सिंचाई (रहट): प्राचीन काल से ही कुओं से पानी निकालने के लिए 'रहट' चलाने में बैलों का उपयोग होता रहा है।

3.    परिवहन (बैलगाड़ी): फसलों को खेत से खलिहान या मंडी तक ले जाने के लिए बैलगाड़ी सबसे सस्ता और सुलभ साधन है।

4.    मड़ाई (Threshing): अनाज के दानों को भूसे से अलग करने के लिए उन्हें बैलों के पैरों तले रौंदा जाता है।

5.    कोल्हू: सरसों का तेल निकालने या गन्ने का रस निकालने के लिए कोल्हू चलाने में बैलों की शक्ति का उपयोग होता है।

शहरों में उपयोग:

1.    माल ढुलाई: शहरों की तंग गलियों में, जहाँ बड़े ट्रक नहीं जा सकते, आज भी भारी सामान (जैसे लोहा, लकड़ी या निर्माण सामग्री) ढोने के लिए बैलगाड़ियों का उपयोग देखा जाता है।

2.    जैविक खाद: बैलों से प्राप्त गोबर शहरों के आसपास के 'किचन गार्डन' और नर्सरी के लिए उत्तम खाद का स्रोत बनता है।

3.    धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व: त्योहारों (जैसे पोला या पोंगल) और मेलों में बैलों की प्रदर्शनी और दौड़ का आयोजन शहरों के सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा है।

निष्कर्ष: बैल भारतीय जीवन के 'मूक सेवक' हैं, जो बिना किसी प्रदूषण के पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा प्रदान करते हैं।

 

अलग-अलग और साथ-साथ-

 

"दो-चार बार मोती ने गाड़ी को सड़‌क की खाई में गिराना चाहा पर हीरा ने संभाल लिया। वह ज्याद सहनशील था।"

1.कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए।

2.हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न

विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती है। कैसे?

3.आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी है। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न है। बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लए कैसा व्यवहार चाहते हैं?

(संकेत- क्या-क्या करें और क्या-क्या न करें, कैसे पढ़ाई खेल आदि में एक-दूसरे की सहायता करें और साथ दें)

उत्तर:

1. हीरा और मोती की विशेषताएँ:

·       हीरा: वह स्वभाव से शांत, धैर्यवान और सहनशील था। वह गंभीर था और अक्सर संकट के समय ठंडे दिमाग से सोचता था।

·       मोती: वह हीरा की तुलना में थोड़ा गरम स्वभाव का, विद्रोही और उत्साही था। वह अन्याय के विरुद्ध तुरंत प्रतिक्रिया देता था और कभी-कभी हिंसक भी हो जाता था।

·       समानता: दोनों ही अत्यंत स्वामीभक्त, निडर, साहसी और एक-दूसरे के प्रति वफादार थे। उनकी दोस्ती गहरी थी और वे एक-दूसरे के सुख-दुख को समझते थे।

2. भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को कैसे पूरा करती हैं?
उत्तर: हीरा और मोती की अलग-अलग प्रकृति उनके बीच एक संतुलन बनाती थी। जहाँ मोती आवेश में आकर गलत कदम उठाने लगता (जैसे गाड़ी खाई में गिराना), वहाँ हीरा अपनी सहनशीलता से उसे संभाल लेता। वहीं दूसरी ओर, जहाँ हीरा की चुप्पी से काम नहीं बनता, वहाँ मोती का विद्रोह उन्हें आजादी दिलाने में मदद करता (जैसे कांजीहौस की दीवार तोड़ना)। मोती का जोश और हीरा का होश मिलकर उन्हें हर मुसीबत से बाहर निकालते थे।

3. सहपाठियों के साथ व्यवहार (सहयोग और संवेदनशीलता):
उत्तर: कक्षा में अलग-अलग स्वभाव वाले दोस्तों के साथ एक सुखद माहौल बनाने के लिए हमें निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

·       हमें क्या करना चाहिए:

o   सम्मान: उनकी खूबियों की तारीफ करें और उनकी कमियों का मजाक न उड़ाएँ।

  •  
    • पढ़ाई में मदद: अगर किसी को कोई विषय समझ नहीं आ रहा, तो उसे प्यार से समझाएँ।
    • खेल में साथ: टीम के रूप में खेलें और एक-दूसरे की जीत पर खुशी मनाएँ।
    • सुनना: उनकी बातों को ध्यान से सुनें ताकि हम उनकी भावनाओं को समझ सकें।
  • हमें क्या नहीं करना चाहिए:
    • किसी को नीचा न दिखाएँ या उनकी भिन्नता (जैसे भाषा या बोलने का तरीका) पर न हँसें।
    • समूहों में न बटें; सबको साथ लेकर चलें।
    • गुस्से में कोई ऐसी बात न कहें जिससे दूसरे को ठेस पहुँचे।

निष्कर्ष: जैसे हीरा और मोती ने अपनी भिन्नता के बावजूद एक-दूसरे का साथ दिया, वैसे ही हमें भी अपने सहपाठियों की विशिष्टता को स्वीकार करना चाहिए।

3.दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक भाषा में विचार-विनिमय करते

थे।"

 

4.कहानी में अनेक स्थानों पर 'मूक-भाषा' का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।

उत्तर- हीरा और मोती की 'मूक भाषा' वास्तव में उनके गहरे लगाव और आपसी समझ का प्रतीक थी। मेरे अनुमान और कल्पना के अनुसार, वे इस प्रकार बातें करते होंगे:

·       शारीरिक संकेतों द्वारा: वे अपने कानों को फड़फड़ाकर, सिर हिलाकर या पूँछ की स्थिति से अपनी भावनाएँ व्यक्त करते होंगे। जैसे, खतरा महसूस होने पर कान खड़े करना या खुशी में पूँछ हिलाना।

·       आँखों के संकेतों से: वे एक-दूसरे की आँखों में देखकर एक-दूसरे का दुख, दर्द या गुस्सा समझ जाते होंगे। जब एक थक जाता, तो दूसरा उसे सहानुभूति भरी नज़रों से देखता होगा।

 

·       सूँघने और चाटने से: अक्सर जानवर एक-दूसरे को सूँघकर या चाटकर अपना प्यार जताते हैं। वे भी इसी तरह एक-दूसरे की थकान मिटाते होंगे और अपनी एकजुटता प्रकट करते होंगे।

·       हुंकार या फुंकार से: कभी-कभी हल्की आवाज़ निकालकर या तेज़ सांसें छोड़कर वे एक-दूसरे को सावधान करते होंगे या किसी योजना (जैसे भागने की) पर अपनी सहमति देते होंगे।

 

5.आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कम कब? कहाँ-कहाँ?

कुछ उदाहरण लिखिए।

उत्तर- वास्तव में, हम अपने दैनिक जीवन में कई बार बिना बोले ही अपनी बात दूसरों तक पहुँचा देते हैं। इसे 'सांकेतिक भाषा' कहते हैं। उदाहरण-

·       कक्षा में : जब शिक्षक पढ़ा रहे होते हैं, तो हम अक्सर अपने मित्र से आँखों ही आँखों में या इशारे से पानी पीने चलने या पेन माँगने की बात करते हैं।

·       अतिथियों के सामने : जब घर में मेहमान आए हों और हमें कोई चीज़ चाहिए हो या माँ को कुछ समझाना हो, तो हम चेहरे के हाव-भाव या आँखों के संकेत से अपनी बात कह देते हैं।

·       खेल के मैदान में : क्रिकेट या फुटबॉल खेलते समय, हम आवाज़ देने के बजाय हाथों के इशारे से रन लेने या बॉल फेंकने का संकेत देते हैं ताकि विपक्षी टीम को हमारी रणनीति पता न चले।

·       सार्वजनिक स्थानों पर: अस्पताल या पुस्तकालय जैसी जगहों पर जहाँ शोर करना मना होता है, वहाँ हम सिर हिलाकर 'हाँ' या 'ना' में जवाब देते हैं या उंगली मुँह पर रखकर 'चुप रहने' का इशारा करते हैं।

·       मंच पर : नाटक या नृत्य के दौरान कलाकार अपनी आँखों और हाथों की मुद्राओ से पूरी कहानी बयां कर देते हैं।

 

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