LESSON PLAN || हिंदी (गंगा - काव्य खंड) || राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद || Class 9 lesson plan for teachers ||

 

1. सामान्य सूचना (General Information)

·       दिनांक: ________

·       कक्षा: 9वीं

·       विषय: हिंदी (गंगा - काव्य खंड)

·       पाठ का नाम: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

·       कवि: गोस्वामी तुलसीदास

 

2. शिक्षण उद्देश्य (Teaching Objectives)

·       सामान्य उद्देश्य:

o   छात्रों में हिंदी भाषा और कविता के प्रति रुचि जाग्रत करना।

o   छात्रों के शब्दकोश में वृद्धि करना तथा काव्य-पाठ की क्षमता का विकास करना।

·       विशिष्ट उद्देश्य:

·       ज्ञानात्मक उद्देश्य: छात्रों को गोस्वामी तुलसीदास जी का परिचय देना, उनके महाकाव्य 'रामचरितमानस' की जानकारी देना तथा अवधी भाषा व दोहा-चौपाई छंदों से परिचित कराना।

·       बोधात्मक उद्देश्य: छात्रों में काव्यांश का सस्वर वाचन करने की क्षमता विकसित करना और प्रसंग के भावार्थ को समझाना।

·       प्रयोगात्मक उद्देश्य: छात्रों में धैर्य, विनम्रता और विवेक के महत्व को समझाना तथा संवाद शैली का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना।

 

  3.  पूर्व ज्ञान  (Assumed prior knowledge)-

 

1. पौराणिक एवं कथा संदर्भ -

·       मुख्य कथा की जानकारी: छात्र रामायण की बुनियादी कहानी से परिचित हैं। वे जानते हैं कि श्री राम, लक्ष्मण, माता सीता और राजा जनक कौन हैं।

·       सीता स्वयंवर की शर्त: छात्रों को पता है कि राजा जनक ने सीता जी के विवाह के लिए शिव-धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी थी, जिसे श्री राम ने पूरा किया।

·       चरित्रों की बुनियादी छवि: छात्र जानते हैं कि श्री राम अत्यंत शांत स्वभाव के हैं, लक्ष्मण जी थोड़े उग्र/तेजस्वी हैं, और महर्षि परशुराम अपने अत्यधिक क्रोध के लिए जाने जाते हैं।

2. भाषाई एवं साहित्यिक ज्ञान-

·       तुलसीदास जी से परिचय: छात्र गोस्वामी तुलसीदास जी के नाम से परिचित हैं और जानते हैं कि उन्होंने 'रामचरितमानस' महाकाव्य लिखा है।

·       काव्य रूप (Format): छात्र कविता के बुनियादी रूपों को समझते हैं। वे चौपाई (चार पंक्तियों का छंद) और दोहा (दो पंक्तियों का छंद) में अंतर करना जानते हैं।

·       भाषा का ज्ञान: छात्र जानते हैं कि हिंदी की कई उपभाषाएं (बोलियां) हैं। उन्हें बुनियादी अंदाजा है कि यह पाठ आधुनिक खड़ी बोली में न होकर पुरानी अवधी भाषा में लिखा गया है।

3. सांस्कृतिक एवं व्यावहारिक समझ-

·       गुरु-शिष्य परंपरा: छात्र प्राचीन भारतीय संस्कृति में ऋषियों, मुनियों और गुरुओं के प्रति राजाओं और राजकुमारों के आदर-सत्कार की परंपरा को समझते हैं।

·       संवाद और व्यंग्य की समझ: छात्र जानते हैं कि बातचीत (संवाद) में क्रोध, आदर और व्यंग्य (सार्काज्म) के भावों को कैसे व्यक्त या महसूस किया जाता है।

 

 

4. अपेक्षित शिक्षण प्रतिफल (Expected Learning Outcomes)-

काव्य कौशल का विकास: छात्र अवधी भाषा के शब्दों को समझ सकेंगे और दोहा-चौपाई शैली में सस्वर काव्य पाठ करने में सक्षम होंगे।

चारित्रिक और व्यावहारिक

 समझ: छात्र श्रीराम की विनम्रता और लक्ष्मण के व्यंग्य के अंतर को पहचानकर जीवन में धैर्य और संयम का महत्व समझ सकेंगे।

 भाव और रस की पहचान: छात्र कविता में छिपे रौद्र रस (परशुराम का क्रोध) और वीर रस (लक्ष्मण का उत्साह) की पहचान कर सकेंगे।

तार्किक क्षमता का विकास: छात्र संवाद शैली के माध्यम से अपनी बात को तर्क के साथ मर्यादा में रहकर प्रस्तुत करना सीख सकेंगे।

क्रोध प्रबंधन : छात्र यह समझ पाएंगे कि अत्यधिक क्रोध किस प्रकार व्यक्ति के विवेक (बुद्धि) को नष्ट कर देता है और शालीनता से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है।

5. शिक्षण-सहायक सामग्री

  • पाठ्यपुस्तक
  • श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड)
  • चित्र/स्लाइड
  • कार्यपत्रक
  • ऑडियो या वीडियो क्लिप (यदि उपलब्ध हो)

 

6.सारांश (summary)-

  • भाषा : अवधी
  • शैली : संवाद शैली
  • रस : वीर एवं रौद्र रस
  • अलंकार : अनुप्रास, पुनरुक्ति प्रकाश

 

यह प्रसंग तुलसीदास रचित 'रामचरितमानस' के बालकांड से लिया गया है। सीता स्वयंवर में श्री राम द्वारा शिव-धनुष टूटने पर अत्यंत क्रोधी ऋषि परशुराम सभा में आते हैं। धनुष खंडित देखकर वे अत्यधिक क्रोधित हो उठते हैं। श्री राम शांत रहकर विनम्रतापूर्वक स्थिति को संभालने का प्रयास करते हैं, परंतु लक्ष्मण परशुराम पर तीखे व्यंग्य बाण कसते हैं। लक्ष्मण के तर्कों से उत्तेजित होकर परशुराम अपने बल और फरसे का भय दिखाते हैं। अंत में, लक्ष्मण के उग्र वचनों से भड़के परशुराम के क्रोध को श्री राम अपनी शीतल और गंभीर वाणी से शांत करते हैं। यह पाठ धैर्य और संयम की सीख देता है।

7. कौशल विकास (skill developed)-

·  भाषाई एवं साहित्यिक कौशल : छात्र प्राचीन अवधी भाषा की शब्दावली, मुहावरों और दोहा-चौपाई काव्य शैली को समझने में सक्षम होंगे।

·  वाचन एवं उच्चारण कौशल : कठिन एवं काव्यात्मक शब्दों का सही लय, गति और आरोह-अवरोह (उतार-चढ़ाव) के साथ शुद्ध उच्चारण करने की क्षमता बढ़ेगी।

·  संवाद एवं अभिव्यक्ति कौशल: छात्र यह सीख पाएंगे कि नाटक या संवाद  के माध्यम से अपनी बात को प्रभावशाली ढंग से कैसे प्रस्तुत किया जाता है।

·  तार्किक एवं विश्लेषणात्मक कौशल : लक्ष्मण और परशुराम के संवादों के माध्यम से छात्र किसी बात के पक्ष और विपक्ष में तर्क देना और परिस्थितियों का विश्लेषण करना सीखेंगे।

·  भाव-पहचान कौशल : साहित्य में विभिन्न रसों, विशेषकर रौद्र रस (क्रोध) और वीर रस (उत्साह) के भावों को पहचानने और उनके अंतर को समझने की क्षमता विकसित होगी।

·  जीवन कौशल - क्रोध प्रबंधन : छात्र यह व्यावहारिक कौशल सीखेंगे कि विपरीत या तनावपूर्ण परिस्थितियों में श्रीराम की तरह शांत रहकर धैर्य, संयम और शालीनता से विवाद को कैसे सुलझाया जाता है।

8.क्रिया कलाप (Activity)-

'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' पाठ को और अधिक रोचक और व्यावहारिक बनाने के लिए कक्षा में "भूमिका निर्वहन" (Role Play) और "संवाद लेखन" की मिश्रित गतिविधि कराई जाएगी।

9.गृहकार्य (homework)-

राम, लक्ष्मण और परशुराम के चरित्र की तुलना 100 शब्दों में लिखिए।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-उत्तर पुस्तिका में करेंगे।

10. संबद्ध सतत विकास लक्ष्य ( SDG Goals)-

SDG 16: शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएँ (Peace, Justice and Strong Institutions

SDG 4: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education)

 

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