1. सामान्य
सूचना -
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दिनांक:
________
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कक्षा: 9वीं
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विषय:
हिंदी
(गंगा - गद्य खंड)
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पाठ का नाम: रीढ़ की
हड्डी
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लेखक
: जगदीश चंद्र माथुर
2. शिक्षण
उद्देश्य -
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सामान्य उद्देश्य:
·
भाषा कौशल: छात्रों
में हिंदी भाषा के प्रति रुचि पैदा करना और उनके शब्दकोश को बढ़ाना।
·
साहित्यिक समझ:
छात्रों
को गद्य, नाटक और
एकांकी जैसी विभिन्न साहित्यिक विधाओं से परिचित कराना।
·
चारित्रिक विकास:
छात्रों
में नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता
और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना का विकास करना।
·
अभिव्यक्ति क्षमता: छात्रों की कल्पना शक्ति, सोचने की क्षमता और शुद्ध उच्चारण के साथ बोलने के
कौशल को बढ़ाना।
विशिष्ट
उद्देश्य-
क) ज्ञानात्मक उद्देश्य :
·
छात्र एकांकी के मुख्य पात्रों (उमा, शंकर, गोपाल
प्रसाद) की मानसिकता को समझ सकेंगे।
·
छात्र समाज में व्याप्त कुरीतियों (जैसे दहेज और
दिखावा) की पहचान कर सकेंगे।
ख)
कौशलात्मक उद्देश्य :
छात्र
नाटक के संवादों को उचित हाव-भाव और आवाज के उतार-चढ़ाव के साथ पढ़ सकेंगे।
छात्र
सामाजिक मुद्दों पर अपने विचार तार्किक और स्पष्ट रूप से व्यक्त कर सकेंगे।
ग)
भावात्मक उद्देश्य :
छात्र
नारी शिक्षा और स्त्री-पुरुष समानता के महत्व को स्वीकार करेंगे।
छात्र
समाज के रूढ़िवादी और दोहरे मापदंडों के खिलाफ उमा की तरह आवाज उठाने की प्रेरणा
ले सकेंगे।
3. पूर्व ज्ञान (Assumed prior knowledge)-
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सामाजिक समझ: छात्र
समाज में लड़के और लड़कियों के बीच होने वाले सामान्य भेदभाव (जैसे पढ़ाई या
स्वतंत्रता में अंतर) से सामान्य रूप से परिचित हैं।
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विवाह और परिवार की अवधारणा: छात्र भारतीय समाज में होने वाले विवाह और उसमें वधू
(लड़की) पक्ष तथा वर (लड़के) पक्ष के बीच होने वाली सामान्य बातचीत व औपचारिकताओं
को जानते हैं।
·
नैतिक और मानवीय मूल्य: छात्र आत्म-सम्मान,
साहस, शिक्षा और स्वाभिमान जैसे बुनियादी मानवीय शब्दों और
उनके महत्व से परिचित हैं।
·
साहित्यिक विधा:
छात्र
कहानी और संवाद विधा की
बुनियादी समझ रखते हैं।
4. अपेक्षित शिक्षण प्रतिफल (Expected Learning Outcomes)-
1. ज्ञानात्मक
प्रतिफल-
·
पात्रों का विश्लेषण: छात्र उमा, गोपाल
प्रसाद और शंकर के चरित्र की विशेषताओं और उनकी सोच के अंतर को स्पष्ट रूप से बता
सकेंगे।
·
सामाजिक बुराइयों की पहचान: छात्र समाज में व्याप्त दिखावे की संस्कृति, दहेज प्रथा और पुरुष-प्रधान मानसिकता के
दुष्प्रभावों को सूचीबद्ध कर सकेंगे।
·
शीर्षक की सार्थकता: छात्र 'रीढ़ की
हड्डी' (व्यक्तित्व
और रीढ़विहीन समाज) के प्रतीकात्मक अर्थ की व्याख्या कर सकेंगे।
2. कौशलात्मक
प्रतिफल (Skills-Based Outcomes)
·
संवाद और अभिनय कौशल: छात्र नाटक के संवादों को सही हाव-भाव, आवाज के उतार-चढ़ाव और भावों
के साथ पढ़ और मंचित कर सकेंगे।
·
तर्कपूर्ण अभिव्यक्ति: छात्र किसी भी अनुचित सामाजिक स्थिति या रूढ़िवादी
विचार के सामने उमा की तरह तार्किक और निर्भीक होकर अपनी बात रख सकेंगे।
·
समीक्षात्मक लेखन:
छात्र
पाठ के मुख्य संदेश पर अपने शब्दों में एक संक्षिप्त समीक्षा या लेख लिख सकेंगे।
3. व्यवहारात्मक एवं मूल्यपरक प्रतिफल (Behavioral & Value-Based Outcomes)
·
समानता का दृष्टिकोण: छात्र लड़कियों की उच्च शिक्षा, उनके आत्म-सम्मान और समाज में स्त्री-पुरुष की
समानता के प्रति एक सकारात्मक और सम्मानजनक दृष्टिकोण प्रदर्शित करेंगे।
·
रूढ़िवादिता का विरोध: छात्र अपने दैनिक जीवन या आस-पड़ोस में होने वाले
लैंगिक भेदभाव को पहचानकर उसका मानसिक या वैचारिक स्तर पर विरोध करना शुरू करेंगे।
5. शिक्षण-सहायक
सामग्री
- पाठ्यपुस्तक
- श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड)
- चित्र/स्लाइड
- कार्यपत्रक
- ऑडियो या वीडियो क्लिप (यदि उपलब्ध हो)
6.सारांश (summary)-
- भाषा : सरल, सहज, व्यावहारिक हिंदी
- शैली
: व्यंग्यात्मक
और संवादात्मक
- विधा: एकांकी
·
"रीढ़ की
हड्डी" जगदीश चंद्र माथुर द्वारा रचित एक सामाजिक एकांकी है, जो नारी शिक्षा और महिलाओं के आत्म-सम्मान पर आधारित
है। रामस्वरूप अपनी पढ़ी-लिखी बेटी उमा का विवाह दकियानूसी सोच वाले गोपाल प्रसाद
के बेटे शंकर से तय करना चाहते हैं। लड़के वाले शिक्षित बहू नहीं चाहते, इसलिए रामस्वरूप उमा की योग्यता छिपाते हैं। जब
गोपाल प्रसाद उमा को वस्तु की तरह परखते हुए अपमानित करते हैं, तो उमा निर्भीक होकर उन्हें उनके बेटे के चरित्रहीन
और रीढ़विहीन होने का
आईना दिखाती है। यह एकांकी संदेश देती है कि लड़कियों का स्वाभिमान और मजबूत
चरित्र ही समाज की असली रीढ़ की हड्डी है।
7. कौशल विकास (skill developed)-
. भाषा एवं
अभिव्यक्ति कौशल-
·
संवाद वाचन कौशल : छात्र नाटक के पात्रों के अनुसार अपनी आवाज़ में
उतार-चढ़ाव, सही
लहज़े और हाव-भाव के साथ संवाद बोलने की कला सीखते हैं।
·
तार्किक अभिव्यक्ति : किसी अनुचित बात का विरोध शांत रहकर, लेकिन उमा की तरह अकाट्य तर्कों (Strong arguments) के साथ करने का कौशल विकसित होता
है।
2. समीक्षात्मक
एवं विश्लेषणात्मक चिंतन-
·
समीक्षात्मक कौशल : छात्र समाज की पुरानी परंपराओं, रूढ़ियों और रूढ़िवादी पुरुष-प्रधान मानसिकता का
विश्लेषण करना और उन पर तार्किक प्रश्न उठाना सीखते हैं।
·
पात्र-विश्लेषण कौशल : समाज के विभिन्न चेहरों (जैसे दिखावा करने वाले
गोपाल प्रसाद और स्वाभिमानी उमा) के व्यवहार को देखकर इंसानी फितरत को समझने का
कौशल बढ़ता है।
3. सामाजिक
एवं जीवन कौशल -
·
सहानुभूति और संवेदनशीलता : समाज में महिलाओं की स्थिति और उनके आत्म-सम्मान के प्रति
छात्रों में संवेदनशीलता का विकास होता है।
·
निर्णय लेने की क्षमता : विषम परिस्थितियों या सामाजिक दबाव में भी अपने
मूल्यों और आत्म-सम्मान से समझौता न करने का जीवन कौशल छात्र सीखते हैं।
8.क्रिया
कलाप (Activity)-
भूमिका
निर्वहन -
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गतिविधि: कक्षा के
छात्रों को अलग-अलग समूहों में बांटा जाएगा। प्रत्येक समूह से छात्र मुख्य पात्रों
(उमा, रामस्वरूप, गोपाल प्रसाद, शंकर) का
रूप लेकर पाठ के मुख्य दृश्यों (जैसे- उमा द्वारा गोपाल प्रसाद को जवाब देने वाला
दृश्य) का अभिनय करेंगे।
·
उद्देश्य: इससे
छात्रों का मंच-भय (Stage fear) दूर होगा, संवाद-वाचन (Speaking
skill) में सुधार होगा और वे पात्रों की भावनाओं को गहराई
से महसूस कर पाएंगे।
2. चर्चा
एवं परिचर्चा-
·
गतिविधि: कक्षा को
दो समूहों में बांटकर एक समसामयिक विषय दिया जाएगा।
o विषय: "क्या आज के आधुनिक समाज में भी
लड़कियों को शादी के बाजार में 'वस्तु' की तरह देखा जाता है?" या "शिक्षा
बनाम रूप-रंग: विवाह के लिए क्या अधिक महत्वपूर्ण है?"
·
उद्देश्य: इससे
छात्रों में तार्किक क्षमता (Reasoning skill),
स्वतंत्र
चिंतन और दूसरों के विचारों को सुनने व अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने का कौशल
विकसित होगा।
9.गृहकार्य (homework)--
रचनात्मक/परियोजना
कार्य
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"नारी
शिक्षा और महिला सशक्तिकरण" विषय पर एक आकर्षक स्लोगन (नारा) लिखिए या एक
छोटा पोस्टर तैयार कीजिए।
·
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-उत्तर पुस्तिका में करेंगे।
10. संबद्ध सतत विकास लक्ष्य (Linked SDG Goals)-
SDG
4: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education)
SDG
5: लैंगिक समानता (Gender Equality)
SDG
10: असमानताओं में कमी (Reduced Inequalities)
SDG
16: शांति, न्याय और मजबूत
संस्थाएँ
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