पाठ 1: "दो बैलों की कथा"
समानार्थी शब्द
बैल — वृषभ, धेनुपति
मित्र — सखा, दोस्त
क्रोध — गुस्सा, रोष
प्रेम — स्नेह, अनुराग
स्वतंत्रता — आज़ादी, स्वाधीनता
दुःख — शोक, पीड़ा
प्रसन्न — खुश, हर्षित
घर — गृह, आवास
मालिक — स्वामी, अधिपति
साहस — वीरता, हिम्मत
अन्याय — अत्याचार, अनीति
बंधन — कैद, पराधीनता
परिश्रम — मेहनत, श्रम
दया — करुणा, अनुकम्पा
अपमान — अनादर, तिरस्कार
प्रमुख मुहावरे
दम तोड़ना — मर जाना
जी जान लगाना — पूरी मेहनत करना
गम खा जाना — दुःख सहकर चुप रह जाना
नाकों चने चबवाना — बहुत परेशान करना
दाँतों तले उँगली दबाना — बहुत आश्चर्यचकित होना
आँखें फेर लेना — उपेक्षा करना
हाथ-पाँव फूल जाना — घबरा जाना
जान पर खेलना — प्राणों की परवाह न करना
मुँह की खाना — हार जाना
कमर टूट जाना — अत्यधिक थक जाना
प्राण हथेली पर रखना — जोखिम उठाना
दिल पसीजना — दया आना
"संवादहीन" –
समानार्थी शब्द
संवाद — वार्तालाप, बातचीत
मौन — चुप्पी, निस्तब्धता
अकेलापन — एकांत, तनहाई
ममता — स्नेह, वात्सल्य
वृद्ध — बूढ़ा, बुजुर्ग
प्रसन्न — खुश, हर्षित
दुःख — पीड़ा, शोक
आशा — उम्मीद, प्रत्याशा
भय — डर, आशंका
स्नेह — प्रेम, अनुराग
घर — गृह, आवास
पक्षी — विहंग, खग
सहारा — आधार, अवलंब
स्वतंत्र — स्वाधीन, आज़ाद
स्मृति — याद, याददाश्त
मुहावरे-
अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना — अपनी प्रशंसा स्वयं करना।
नैया पार लगना — कठिनाई से छुटकारा पाना, काम सफल होना।
पौ फटना — सुबह होना।
प्राण लौट आना — उत्साह या जान वापस आ जाना।
हाथों के तोते उड़ जाना — घबरा जाना, होश उड़ जाना।
ममता बरस पड़ना — अत्यधिक स्नेह उमड़ पड़ना।
आसमान सिर पर उठा लेना — बहुत शोर मचाना।
हाथ पीले करना — विवाह करना।
मुझे आज लिखना ही पड़ेगा। अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंध लेखक ए. जी. गार्डिनर का कथन है कि लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है। उस समय मन में कुछ ऐसी उमंग-सी उठती है, हृदय में कुछ ऐसी स्फूर्ति-सी आती है, मस्तिष्क में कुछ ऐसा आवेग-सा उत्पन्न होता है कि लेख लिखना ही पड़ता है। उस समय विषय की चिंता नहीं रहती। कोई भी विषय हो, उसमें हम अपने हृदय के आवेग को भर ही देते हैं। हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है। उसी तरह अपने मनोभावों को व्यक्त करने के लिए कोई भी विषय उपयुक्त है। असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं। इसी तरह मन के भाव ही तो यथार्थ वस्तु हैं, विषय नहीं।
प्रश्न 1. लेखक के अनुसार लेखन की 'विशेष मानसिक स्थिति' से क्या तात्पर्य है? (1 अंक)
प्रश्न 2. "असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।" इस कथन का आशय अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए। (1 अंक)
प्रश्न 3. गद्यांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक विषय की अपेक्षा मनोभावों को अधिक महत्त्व क्यों देता है। (1 अंक)
4.लेखक के अनुसार किसी भी विषय पर प्रभावशाली लेखन किस आधार पर संभव है? (1 अंक)
प्रश्न 5. निम्नलिखित में से किसी एक शब्द का अर्थ लिखिए—
स्फूर्ति
आवेग (1 अंक)
प्रश्न 6.आधुनिक जीवन में संवादहीनता की समस्या क्यों बढ़ रही है?
प्रश्न 7.परिवार में संवाद का क्या महत्व है?
प्रश्न 8.लेखक के मन में लेखन को लेकर कैसी दुविधा थी?
ऐसी भी बातें होती हैं' -
समानार्थी शब्द -
* बात – वचन, कथन
* प्रेम – स्नेह, अनुराग
* सम्मान – आदर, प्रतिष्ठा।
* सफलता – कामयाबी, विजय
* शरीर – तन, काया
* संगीत – गान, गंधर्व
* जीवन – जिंदगी, प्राण
* नश्वर – नाशवान, अनित्य
महत्वपूर्ण मुहावरे और उनके अर्थ -
1.आसमान से बातें करना – बहुत ऊँचा होना या अत्यधिक उन्नति करना (सफलता के लिए)।
2.हाथ का मैल होना – बहुत तुच्छ या आसानी से आने-जाने वाली वस्तु (धन के संदर्भ में)।
3.लोहे के चने चबाना – कठिन संघर्ष या कठिनाइयों का सामना करना
4.दिन काटना – बहुत कठिन परिस्थितियों में समय बिताना।5.जान पर खेलना – अत्यधिक साहस दिखाना या जोखिम उठाना।
6.रंग लाना – मेहनत का सफल होना (कठिन परिश्रम के बाद सफलता मिलना)
1.संवादहीन – बातचीत रहित, मौन, मूक
2.पौ फटना – भोर होना, सवेरा होना, सूर्योदय का समय
3.कुशाग्र – तीव्र बुद्धि वाला, प्रखर
4.निहाल – अत्यंत प्रसन्न,संतुष्ट
5.देहरी – चौखट,द्वार
मुहावरे-
1.अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना-
अर्थ: अपनी प्रशंसा स्वयं करना या खुद की बड़ाई खुद करना।
2.तोते उड़ जाना-अचानक घबरा जाना या स्तब्ध रह जाना।
3.नैया पार लगना-संकट या मुसीबत से छुटकारा मिलना
4.क्या से क्या हो जाना-स्थिति में बहुत बड़ा या अप्रत्याशित बदलाव आ जाना।
संभुधनु – शिवजी का धनुष, त्रिपुरारिधनु
रिपु – शत्रु, दुश्मन, वैरी
लरिकाईं – बचपन में, बाल्यकाल
भूप – राजा, नरेश, सम्राट
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