संवाद लेखन ||

 संवाद लेखन - दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच होने वाली बातचीत को लिखित रूप में प्रस्तुत करना संवाद लेखन कहलाता है। 


संवाद लिखते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

1.संक्षिप्त और सरल: वाक्य छोटे, स्पष्ट और समझने में आसान होने चाहिए। 

2.स्वाभाविकता: बातचीत ऐसी होनी चाहिए जैसी असल ज़िंदगी में होती है (कृत्रिम नहीं)। 

3.पात्रानुकूल भाषा: पात्रों की उम्र, पद और संबंध के अनुसार ही भाषा का प्रयोग करें (जैसे: मित्र से 'तुम' और बड़ों से 'आप' कहें)।

 4.विराम चिह्नों का प्रयोग: उचित स्थानों पर प्रश्नवाचक (?), विस्मयादिबोधक (!), और पूर्णविराम (।) का सही प्रयोग करें।

5.कोष्ठक का प्रयोग: यदि पात्र के हाव-भाव या क्रिया को दिखाना हो, तो उसे कोष्ठक में लिखें जैसे: राकेश (मुस्कुराते हुए)।



परीक्षा की तैयारी को लेकर पिता और पुत्र के बीच संवाद लिखिए। 


पिता: रोहन, तुम्हारी वार्षिक परीक्षा नज़दीक आ रही है। तैयारी कैसी चल रही है?

पुत्र: जी पिताजी, तैयारी अच्छी चल रही है। मैंने गणित और विज्ञान का दोहराव कर लिया है।पिता: बहुत बढ़िया! लेकिन क्या तुम्हें किसी विषय में कोई कठिनाई आ रही है?

पुत्र: हाँ पिताजी, मुझे हिंदी व्याकरण के कुछ विषयों में थोड़ी परेशानी हो रही है।

पिता: कोई बात नहीं, आज शाम को हम दोनों मिलकर उसपर अभ्यास करेंगे। समय का सही उपयोग करो।

पुत्र: धन्यवाद पिताजी! मैं समय सारणी के अनुसार ही पढ़ाई कर रहा हूँ और अच्छे अंक लाऊँगा।पिता: मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ है। मेहनत करते रहो।


पर्यावरण प्रदूषण' या 'प्लास्टिक के बढ़ते प्रयोग' पर दो सहेलियों (रीना और मीना) के बीच संवाद लिखिए। 

रीना: मीना, कल तुम बाज़ार से प्लास्टिक की थैलियों में सामान ला रही थीं?

मीना: हाँ रीना, जल्दी में मैं घर से कपड़े का थैला ले जाना भूल गई थी।

रीना: तुम्हें तो पता है न कि प्लास्टिक हमारे पर्यावरण के लिए कितना खतरनाक है।मीना: हाँ जानती हूँ, पर एक-दो प्लास्टिक की थैलियों से क्या फर्क पड़ता है?

रीना: फर्क पड़ता है मीना! यदि हर व्यक्ति यही सोचेगा, तो पृथ्वी कचरे का ढेर बन जाएगी। यह गलता भी नहीं है।

मीना: (सोचते हुए) तुम्हारी बात सही है, नालियाँ भी इसी प्लास्टिक की वजह से जाम हो जाती हैं।

रीना: बिल्कुल, और जानवर भी इसे खाकर बीमार हो जाते हैं। हमें इसका पूरी तरह बहिष्कार करना चाहिए।

मीना: मैं आज ही प्रतिज्ञा करती हूँ कि आगे से हमेशा अपने साथ कपड़े का थैला रखूंगी। धन्यवाद!


समय का सदुपयोग' विषय पर दो छात्रों (अमन और साहिल) के बीच संवाद लिखिए। 

अमन: साहिल, कल तुम स्कूल क्यों नहीं आए थे?

साहिल: मैं रात भर मोबाइल पर गेम खेलता रहा, इसलिए सुबह आँख ही नहीं खुली।

अमन: यह तो बहुत गलत बात है। तुम खेल के चक्कर में अपनी पढ़ाई और सेहत दोनों खराब कर रहे हो।

साहिल: हाँ, आजकल मेरा किसी काम में मन नहीं लगता और समय भी कम पड़ जाता है।

अमन: समय कम नहीं पड़ता भाई, तुम उसका दुरुपयोग कर रहे हो। जो समय की कद्र नहीं करता, समय उसे पीछे छोड़ देता है।

साहिल: मुझे अपनी गलती का अहसास है। मैं अपनी इस आदत को कैसे सुधारूँ?

अमन: एक निश्चित समय-सारणी बनाओ। उसमें पढ़ने, खेलने और सोने का समय तय करो।साहिल: ठीक है, आज ही से मैं इस नियम का पालन करूँगा और समय बर्बाद नहीं करूँगा।


पुस्तकों के महत्व' पर दो पाठकों या मित्रों के बीच संवाद लिखिए। 

विवेक: आनंद, तुम हर समय किताबों में ही क्यों खोए रहते हो?

आनंद: विवेक, पुस्तकें हमारी सबसे अच्छी मित्र होती हैं। इनसे हमें अपार ज्ञान मिलता है।

विवेक: पर आजकल तो सारा ज्ञान इंटरनेट और यूट्यूब पर उपलब्ध है, फिर किताब क्यों पढ़ना?

आनंद: इंटरनेट से जानकारी तो मिलती है, पर किताबों को पढ़ने से हमारी एकाग्रता और सोचने की क्षमता बढ़ती है।

विवेक: यह बात तो मैंने कभी सोची ही नहीं। क्या सचमुच किताबें पढ़ने से भाषा भी सुधरती है?

आनंद: हाँ बिल्कुल! हमारी शब्दावली मज़बूत होती है और लिखने की कला में सुधार आता है।

विवेक: तो फिर मुझे भी कोई अच्छी किताब बताओ, मैं भी आज से पढ़ना शुरू करूँगा।आनंद: यह पंचतंत्र की कहानियों की किताब लो, तुम्हें बहुत पसंद आएगी।

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