स्पर्श पद्यांश || Class 9 ||

 रैदास के पद-

1. रैदास ने भगवान को 'गरीब निवाजु' क्यों कहा है?

रैदास के अनुसार, उनके स्वामी दीन-दुखियों और समाज द्वारा उपेक्षित अछूतों पर दया करने वाले हैं। वे किसी के डर की परवाह किए बिना निचले वर्ग के लोगों का उद्धार कर उन्हें समाज में उच्च सम्मान और पद प्रदान करते हैं।


2. जाकी अँग-अँग बास समानी' पंक्ति का आशय क्या है?

कवि रैदास समझाते हैं कि जिस प्रकार पानी चंदन के संपर्क में रहकर उसकी सुगंध को अपने भीतर सोख लेता है, उसी प्रकार भक्त का रोम-रोम ईश्वर की भक्ति में ऐसा लीन हो गया है कि प्रभु का वास उसके संपूर्ण शरीर में महसूस होता है।


3. जैसे सोनहिं मिलत सुहागा' का क्या अर्थ है?

जिस प्रकार सुहागा सोने के संपर्क में आकर उसकी अशुद्धियों को दूर कर उसमें चमक और शुद्धता बढ़ा देता है, उसी प्रकार ईश्वर की भक्ति भक्त के मन को पावन और मूल्यवान बना देती है।


4. रैदास ने अपने दूसरे पद में किन-किन संतों का उल्लेख किया है तथा क्यों?

रैदास ने नामदेव, कबीर, त्रिलोचन, सधना और सैनु जैसे महान संतों का नाम लिया है। वे बताते हैं कि कैसे ईश्वर ने इन संतों का उद्धार किया, जबकि समाज इन्हें निम्न जाति का मानकर उपेक्षित करता था।



रहीम के दोहे-

1. रहिम धागा प्रेम का...' दोहे के माध्यम से कवि क्या चेतावनी दे रहे हैं?

रहीम चेतावनी देते हैं कि प्रेम रूपी नाजुक धागे को झटक कर नहीं तोड़ना चाहिए। यदि यह एक बार टूट जाए, तो दोबारा पहले जैसा नहीं जुड़ता। यदि जुड़ता भी है, तो मन में संशय और कड़वाहट की एक गाँठ हमेशा के लिए रह जाती है।


2. पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून" का अर्थ स्पष्ट करें।

यहाँ 'पानी' के तीन गहरे अर्थ हैं। मोती के संदर्भ में इसका अर्थ 'चमक' (आभा) है, मनुष्य के संदर्भ में 'आत्मसम्मान' या 'इज्जत' है, और आटे के संदर्भ में इसका अर्थ साधारण 'जल' है। इन तीनों के बिना इनका जीवन और मूल्य समाप्त हो जाता है।


3. रहीम ने छोटी वस्तु की उपेक्षा न करने की सलाह क्यों दी है?

रहीम के अनुसार, जीवन में हर छोटी-बड़ी वस्तु की अपनी विशेष उपयोगिता होती है। जिस कार्य के लिए सुई की आवश्यकता होती है, वहाँ बड़ी तलवार काम नहीं आ सकती। अतः बड़ी वस्तु के मिलने पर छोटी को तुच्छ मानकर त्यागना गलत है।


गीत-अगीत-

1. नदी अपने किनारों से क्या कहना चाहती है?

उत्तर: पर्वत से तेजी से नीचे उतरती नदी विरह की वेदना में कल-कल की ध्वनि करती बहती है। वह अपने किनारों से अपने दिल की व्यथा साझा करना चाहती है ताकि उसका मन हल्का हो सके, लेकिन किनारे उसकी पुकार सुनकर भी मूक खड़े रहते हैं।


2. शुकी क्यों नहीं गा पाती?

उत्तर: शुकी अपने साथी तोते के मधुर प्रेम और मातृत्व के सुख में इतनी गहराई से डूबी हुई है कि उसकी भावनाएँ उसके गले से स्वर बनकर नहीं निकल पातीं। वह मन ही मन प्रसन्न है, इसलिए उसका यह मौन अनुभव 'अगीत' कहलाता है।


3. 'अगीत' क्या है और यह क्यों सुंदर है?

उत्तर: वह पवित्र भावना या प्रेम जो हृदय के भीतर ही रह जाए और शब्दों के माध्यम से व्यक्त न हो सके, 'अगीत' है। कवि मानते हैं कि अनकही अनुभूतियाँ भी उतनी ही सुंदर और प्रभावशाली होती हैं जितनी कि लयबद्ध गाए हुए गीत। 


4. गीत-अगीत' कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि प्रकृति की अभिव्यक्तियाँ भी सुंदर क्यों हैं। क्या 'अगीत' वास्तव में 'गीत' से श्रेष्ठ है?

उत्तर: 'गीत-अगीत' कविता में रामधारी सिंह दिनकर ने प्रकृति के मूक भावों को 'अगीत' कहा है। कवि के अनुसार, नदी का कल-कल बहना, गुलाब का मौन रहकर ईश्वर से वाणी की चाह करना और शुकी का प्रेम में डूबे रहकर मौन रहना, ये सभी उतनी ही सुंदर अभिव्यक्तियाँ हैं जितना कि मनुष्य द्वारा गाया गया लयबद्ध गीत। यहाँ 'अगीत' श्रेष्ठ इसलिए जान पड़ता है क्योंकि वह हृदय की शुद्ध अनुभूतियों और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है, जो शब्दों का मोहताज नहीं है। अंततः कवि यह निष्कर्ष निकालते हैं कि दोनों ही अपनी-अपनी जगह सुंदर हैं, क्योंकि सुंदरता केवल स्वर में नहीं, बल्कि भाव की गहराई में होती है। 



अग्नि पथ-

1. कवि ने 'एक पत्र छाँह' भी माँगने से क्यों मना किया है?

उत्तर: कवि का मानना है कि यदि संघर्षशील मनुष्य मार्ग में मिलने वाली थोड़ी सी भी सुख-सुविधा या सहायता (छाँह) की अपेक्षा करेगा, तो उसका आत्मविश्वास कमजोर हो जाएगा। उसे बिना किसी बाहरी सहारे के अपने संकल्प के बल पर अकेले ही आगे बढ़ना चाहिए।


2. अग्नि पथ' किसका प्रतीक है?

उत्तर: 'अग्नि पथ' मनुष्य के जीवन में आने वाली उन कठिन परिस्थितियों, कष्टों और बाधाओं का प्रतीक है जो उसे लक्ष्य तक पहुँचने से रोकती हैं। यह एक ऐसा मार्ग है जहाँ केवल साहस और निरंतर कर्म ही सफलता दिला सकते हैं।


3. कविता का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर: कविता संदेश देती है कि मनुष्य को बिना थके, बिना रुके और पीछे मुड़े अपनी शपथ पर अडिग रहकर कर्म करना चाहिए। पसीने और रक्त से लथपथ होकर भी लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना ही जीवन की असली सार्थकता और महानता है। 


4. अग्निपथ' कविता का केंद्रीय भाव स्पष्ट कीजिए। यह कविता आज के युवा वर्ग के लिए किस प्रकार प्रेरणादायक है?

उत्तर: 'अग्निपथ' कविता का केंद्रीय भाव निरंतर संघर्ष और अडिग संकल्प के साथ जीवन पथ पर आगे बढ़ना है। कवि हरिवंश राय बच्चन जीवन को चुनौतियों से भरा एक 'अग्निपथ' मानते हैं जहाँ पग-पग पर कष्ट हैं। यह कविता आज के युवाओं को संदेश देती है कि सफलता का मार्ग सुख-सुविधाओं (छाँह) से नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और कठिन परिश्रम से प्रशस्त होता है। कवि युवाओं को शपथ लेने के लिए प्रेरित करते हैं कि वे परिस्थितियों के सामने कभी नहीं झुकेंगे और अपनी मेहनत (अश्रु-स्वेद-रक्त) के बल पर लक्ष्य प्राप्त करेंगे। यह कविता सिखाती है कि हार न मानना ही जीवन की असली महानता है। 


खुशबू रचते हैं हाथ-

1. कविता में खुशबू रचने वाले हाथों के परिवेश का वर्णन कीजिए। वहाँ के दूषित माहौल के बावजूद वे समाज को क्या प्रदान करते हैं?

उत्तर: 'खुशबू रचते हैं हाथ' कविता में कवि अरुण कमल ने उन मजदूरों के परिवेश का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है जो अगरबत्तियाँ बनाते हैं। ये लोग शहर के सबसे उपेक्षित और बाहरी क्षेत्रों में, बदबूदार तंग गलियों और गंदे नालों के पास रहने को मजबूर हैं। वहाँ कूड़े-करकट के ढेर लगे होते हैं और हवा में इतनी दुर्गंध होती है कि नाक फटी जाती है। इस नरकीय वातावरण में रहते हुए भी ये 'गंदे' हाथ रात-दिन मेहनत करके दुनिया के लिए केवड़ा, गुलाब, खस और रानी जैसी विभिन्न खुशबुओं वाली अगरबत्तियाँ रचते हैं। यह समाज की सबसे बड़ी विडंबना है कि जो लोग दूसरों के घरों और पूजाघरों को महकाते हैं, वे स्वयं गंदगी और उपेक्षा के बीच अपना जीवन गुज़ारते हैं। 


नए इलाके में- 

1. कविता के माध्यम से कवि ने आधुनिक शहरी जीवन की किस विडंबना और परिवर्तनशीलता को रेखांकित किया है?

उत्तर: 'नए इलाके में' कविता आधुनिक शहरों की तीव्र गति से बदलती तस्वीर और मनुष्य के अलगाव को दर्शाती है। कवि बताते हैं कि शहरों में निर्माण कार्य इतनी तेज़ी से हो रहा है कि एक ही दिन में दुनिया पुरानी लगने लगती है। कवि जब अपने गंतव्य को खोजने के लिए पुरानी निशानियों—जैसे पीपल का पेड़, ढहा हुआ मकान या खाली प्लॉट—पर भरोसा करते हैं, तो वे रास्ता भूल जाते हैं क्योंकि वे निशानियाँ अब मिट चुकी हैं। यह कविता मनुष्य की स्मृतियों के कमज़ोर होने और निरंतर बदलते परिवेश में स्वयं को व्यवस्थित करने की कठिनाई को उजागर करती है। यहाँ समय की कमी और पहचान के संकट की ओर भी इशारा किया गया है, जहाँ व्यक्ति को अपने ही घर तक पहुँचने के लिए दूसरों की सहायता (शायद पुकार ले कोई पहचाना ऊपर से) की ज़रूरत पड़ती है। 


2.अरुण कमल की इन दोनों कविताओं का मुख्य संदेश या उद्देश्य क्या है? विस्तार से समझाइए।

उत्तर: इन दोनों कविताओं का सामूहिक उद्देश्य समाज की कड़वी सच्चाइयों और तेज़ी से बदलते मानवीय मूल्यों के प्रति पाठकों को जागरूक करना है। 'खुशबू रचते हैं हाथ' के माध्यम से कवि समाज के उस शोषित मजदूर वर्ग की दयनीय स्थिति की ओर ध्यान खींचना चाहते हैं जो अपनी मेहनत से दुनिया को खुशहाल बनाता है पर स्वयं बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। वहीं, 'नए इलाके में' के ज़रिए वे आधुनिक जीवन की अस्थिरता और अंधाधुंध शहरीकरण के कारण पुरानी पहचानों के मिटने के दुःख को व्यक्त करते हैं। कवि का मुख्य संदेश यह है कि हमें न केवल सामाजिक और आर्थिक विषमताओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए, बल्कि इस बदलती दुनिया में मानवीय संवेदनाओं और आपसी रिश्तों को भी बचाए रखने की कोशिश करनी चाहिए। 




खुशबू रचते हैं हाथ इस कविता का मुख्य संदेश क्या है?

कविता संदेश देती है कि समाज को उन उपेक्षित मजदूरों की दयनीय दशा पर ध्यान देना चाहिए जो गंदगी में रहकर हमारे जीवन में सुगंध (अगरबत्तियाँ) फैलाते हैं।


'नए इलाके में' कविता में कवि ने शहरों की किस विडंबना और परिवर्तनशीलता की ओर संकेत किया है? विस्तार से लिखिए।

उत्तर: इस कविता में कवि अरुण कमल ने शहरी जीवन की तीव्र गति और उससे उत्पन्न होने वाली पहचान के संकट को चित्रित किया है । शहरों में निर्माण कार्य इतनी तेज़ी से होता है कि एक ही दिन में भूगोल बदल जाता है। कवि अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए पुराने निशानों जैसे पीपल का पेड़, ढहा हुआ मकान और खाली प्लॉट पर निर्भर रहता है, लेकिन वे निशान अब मिट चुके हैं। यह विडंबना है कि यहाँ 'स्मृति' अब धोखा देने लगी है क्योंकि दुनिया हर पल नए रंग बदल रही है। कविता का गहरा संदेश यह है कि आधुनिक युग में कुछ भी स्थायी नहीं है और व्यक्ति के पास दूसरों के लिए समय का सर्वथा अभाव है। यहाँ तक कि पड़ोसी भी एक-दूसरे को नहीं पहचानते, जो मानवीय संवेदनाओं के ह्रास को दर्शाता है।


"एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय" पंक्ति के माध्यम से रहीम ने किस व्यावहारिक सत्य को प्रतिपादित किया है?

उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से रहीम दास जी ने लक्ष्य की एकाग्रता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि यदि हम एक समय में केवल एक ही मुख्य लक्ष्य पर अपनी पूरी शक्ति लगा दें, तो वह कार्य अवश्य सफल होगा। यदि हम एक साथ कई कार्यों को साधने का प्रयास करेंगे, तो कोई भी कार्य पूर्ण नहीं हो पाएगा। उदाहरण स्वरूप, जिस प्रकार वृक्ष की जड़ को सींचने से पूरे पेड़ को पानी मिल जाता है और वह फूलों-फलों से लद जाता है, उसी प्रकार मुख्य कार्य या मूल तत्व को साधने से बाकी सभी सहायक कार्य स्वतः ही संपन्न हो जाते हैं। यह दोहा हमें सिखाता है कि सफलता के लिए प्राथमिकताओं का चयन और उन पर अडिग रहना अनिवार्य है।

Comments